अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नेपीडॉ, म्यांमार | 1 मई 2026
म्यांमार की राजनीति से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। देश की पूर्व नेता और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता Aung San Suu Kyi को अब जेल से निकालकर घर में नजरबंद कर दिया गया है। यह जानकारी म्यांमार की सैन्य सरकार ने खुद दी है।
करीब 80 साल की सू ची को 2021 में हुए सैन्य तख्तापलट के बाद से हिरासत में रखा गया था। तब सेना ने उनकी चुनी हुई सरकार को हटाकर सत्ता अपने हाथ में ले ली थी। उसके बाद से वह लगातार कैद में थीं और उनकी सेहत और हालात को लेकर ज्यादा जानकारी भी सामने नहीं आई।
अब सेना प्रमुख Min Aung Hlaing ने बयान जारी कर कहा है कि उनकी बाकी सजा को “घर में नजरबंदी” में बदल दिया गया है। राज्य टीवी पर उनकी एक तस्वीर भी दिखाई गई, जिसमें वह दो सुरक्षाकर्मियों के साथ बैठी नजर आईं।
लेकिन इस फैसले पर उनके परिवार ने संदेह जताया है। उनके बेटे किम एरिस ने कहा कि उन्हें इस बात का कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला है कि उनकी मां को सच में घर ले जाया गया है। उन्होंने यहां तक कहा कि जो तस्वीर दिखाई गई है, वह पुरानी भी हो सकती है। उनका कहना है कि जब तक उन्हें सीधे बात करने या किसी स्वतंत्र स्रोत से पुष्टि नहीं मिलती, तब तक वह इस खबर पर भरोसा नहीं करेंगे।
दरअसल, पिछले कई सालों से सू ची पूरी तरह दुनिया से कट चुकी थीं। उनके वकील तक उनसे नहीं मिल पाए और परिवार का भी संपर्क टूट गया था। 2021 में गिरफ्तारी के बाद उन पर कई मामले चलाए गए और उन्हें लंबी सजा सुनाई गई, जिसे बाद में कुछ हद तक कम भी किया गया।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सू ची को घर में नजरबंद करना म्यांमार की सेना की नई रणनीति का हिस्सा हो सकता है। हाल के महीनों में सेना पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा है और वह अपने ऊपर लगे अलगाव को कम करना चाहती है। ऐसे में यह कदम एक संकेत माना जा रहा है कि आगे कुछ और बदलाव भी हो सकते हैं।
Aung San Suu Kyi कभी म्यांमार में लोकतंत्र की सबसे बड़ी आवाज मानी जाती थीं। उन्होंने पहले भी करीब 15 साल घर में नजरबंदी झेली थी और उसी दौरान उनकी छवि पूरी दुनिया में मजबूत हुई थी। हालांकि बाद में रोहिंग्या संकट को लेकर उनके रुख ने उनकी अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान भी पहुंचाया।
यह साफ नहीं है कि यह कदम उनकी पूरी रिहाई की तरफ पहला कदम है या सिर्फ एक सीमित राहत। लेकिन इतना जरूर है कि पांच साल बाद उनकी स्थिति में आए इस बदलाव ने म्यांमार की राजनीति में फिर हलचल पैदा कर दी है।




