[the_ad id="179"]
Home » International » यूक्रेन की जमीन अब भी जख्मी: चार साल बाद भी खेतों में बिछी हैं मौत की सुरंगें

यूक्रेन की जमीन अब भी जख्मी: चार साल बाद भी खेतों में बिछी हैं मौत की सुरंगें

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | कीव/मायरोत्स्के, यूक्रेन | 1 मई 2026

यूक्रेन के मध्य इलाके में एक गांव है—मायरोत्स्के। यहां इन दिनों एक अलग ही दृश्य देखने को मिल रहा है। खेतों में फसल नहीं, बल्कि मौत छिपी है… और उसे तलाश रहे हैं दर्जनों लोग, हाथों में मेटल डिटेक्टर लिए, धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए। उनकी चाल इतनी सावधानी भरी है जैसे कोई किसान फसल काट रहा हो, लेकिन यहां हर कदम जान जोखिम में डालकर उठाया जा रहा है।

ये लोग दरअसल माइंस हटाने वाली टीम का हिस्सा हैं, जो जमीन के नीचे छिपे बारूदी सुरंगों और फटे बिना पड़े हथियारों को ढूंढ रहे हैं। यह वही इलाका है, जो रूस के कब्जे में था, जब चार साल पहले यूक्रेन पर हमला शुरू हुआ था। राजधानी कीव से करीब 40 किलोमीटर दूर यह क्षेत्र आज भी उस युद्ध के जख्म ढो रहा है।

जंगलों और खेतों में हर जगह खतरा है। एक गलत कदम और ज़िंदगी खत्म। इसलिए ये टीम कतार बनाकर, बेहद सटीक तालमेल के साथ आगे बढ़ती है। हर इंच जमीन को जांचा जाता है, क्योंकि यहां सिर्फ मिट्टी नहीं, मौत भी दबाई गई है।

स्थानीय लोगों के लिए यह काम बेहद जरूरी है। युद्ध खत्म होने के बाद भी वे अपने ही खेतों में नहीं जा पा रहे थे। खेती, पशुपालन और रोजमर्रा की जिंदगी सब ठप पड़ गई थी। अब इन माइंस को हटाने के बाद ही लोग सुरक्षित तरीके से अपनी जमीन पर लौट पाएंगे।

विशेषज्ञों का कहना है कि यूक्रेन के कई इलाकों में लाखों की संख्या में बारूदी सुरंगें और अनफटे गोले फैले हुए हैं। इन्हें हटाने में सालों लग सकते हैं। यह काम धीमा जरूर है, लेकिन जरूरी भी उतना ही है, क्योंकि एक छोटी सी चूक कई जिंदगियों को खत्म कर सकती है।

मायरोत्स्के के खेत आज यह याद दिलाते हैं कि युद्ध सिर्फ बंदूक और बम तक सीमित नहीं रहता, उसका असर पीढ़ियों तक जमीन और जिंदगी पर बना रहता है। यहां हर दिन, हर कदम एक लड़ाई है—मौत के खिलाफ, और जिंदगी को वापस लाने के लिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *