अंतरराष्ट्रीय | एजेंसी / ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन/बीजिंग/पनामा | 30 अप्रैल 2026
दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में शामिल पनामा नहर अब अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते तनाव का केंद्र बन गई है। पिछले कुछ समय में दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हुए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार को लेकर चिंता बढ़ गई है। यह नहर वैश्विक सप्लाई चेन की रीढ़ मानी जाती है और यहां किसी भी तरह की बाधा सीधे दुनिया भर के बाजारों को प्रभावित कर सकती है।अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने चीन पर आरोप लगाया है कि वह पनामा से जुड़े जहाजों को अपने बंदरगाहों पर रोक रहा है और उनकी आवाजाही में देरी कर रहा है। अमेरिका का कहना है कि चीन समुद्री व्यापार को दबाव बनाने के साधन के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। दूसरी ओर चीन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए अमेरिका पर ही वैश्विक व्यापार को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया है।
इस विवाद की पृष्ठभूमि पनामा के एक अहम फैसले से जुड़ी है। पनामा की सुप्रीम कोर्ट ने हांगकांग से जुड़ी एक कंपनी को बंदरगाह संचालन का अधिकार खत्म कर दिया था। यह फैसला ऐसे समय में आया जब अमेरिका लगातार पनामा पर चीन के प्रभाव को सीमित करने का दबाव बना रहा था। इस फैसले के बाद हालात तेजी से बदले और अब यह मामला खुलकर वैश्विक स्तर पर टकराव का रूप ले चुका है।
पनामा नहर के महत्व को इसी से समझा जा सकता है कि दुनिया के करीब 6 प्रतिशत व्यापारिक जहाज इसी रास्ते से गुजरते हैं। अगर यहां जहाजों की आवाजाही धीमी होती है या रुकती है, तो सामान की सप्लाई प्रभावित होती है, कीमतों में बढ़ोतरी होती है और बाजार में अस्थिरता बढ़ती है।
स्थिति और जटिल इसलिए हो गई है क्योंकि पश्चिम एशिया में होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी तनाव बना हुआ है। वहां पहले से जहाज फंसे हुए हैं, तेल की सप्लाई पर असर पड़ा है और कई जहाजों को लंबा रास्ता अपनाना पड़ रहा है। ऐसे माहौल में पनामा नहर में बढ़ता तनाव वैश्विक शिपिंग पर अतिरिक्त दबाव डाल रहा है।
समुद्री मार्गों को लंबे समय तक निष्पक्ष और सुरक्षित माना जाता रहा, लेकिन अब इन रास्तों पर भी बड़ी शक्तियों की रणनीतिक पकड़ बढ़ाने की कोशिश साफ दिखाई दे रही है। इसका असर व्यापार, बीमा, परिवहन लागत और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर पड़ रहा है।
पनामा के राष्ट्रपति ने इस पूरे मामले में संयम बरतने की अपील की है और सभी देशों के साथ संतुलन बनाए रखने की बात कही है। इसके बावजूद हालात यह संकेत दे रहे हैं कि यह टकराव आने वाले समय में और गहराने की आशंका रखता है।
यह विवाद अब सिर्फ दो देशों के बीच का मामला नहीं रह गया है, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और व्यापारिक ढांचे पर असर डालने वाली स्थिति बन चुका है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि वैश्विक समुद्री रास्ते सहयोग का माध्यम बने रहते हैं या फिर शक्ति प्रदर्शन का नया मैदान बनते हैं।




