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हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ी चिंता, भारत ने तेज की समुद्री ताकत बढ़ाने की तैयारी

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अंतरराष्ट्रीय | विशेष संवाददाता | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 30 अप्रैल 2026

वैश्विक हालात को देखते हुए भारत ने अपनी समुद्री ताकत और शिपिंग क्षमताओं को तेजी से मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। खास तौर पर हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच सरकार अब सप्लाई चेन को सुरक्षित रखने पर जोर दे रही है।

 

इसी सिलसिले में केंद्र सरकार ने एक उच्च स्तरीय बैठक की, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्री Sarbananda Sonowal ने की। इस बैठक में अलग-अलग मंत्रालयों के बीच समन्वय बढ़ाने और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मजबूत समुद्री ढांचा तैयार करने पर चर्चा हुई।

बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि भारत को अपनी शिपिंग क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ बंदरगाहों को आधुनिक बनाना होगा, ताकि किसी भी अंतरराष्ट्रीय संकट की स्थिति में देश की सप्लाई चेन प्रभावित न हो। हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस का परिवहन होता है। ऐसे में वहां किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा असर भारत जैसे देशों पर पड़ सकता है।

सरकार का मानना है कि आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ते हुए भारत को अपने समुद्री ढांचे को और मजबूत करना जरूरी है। इसके तहत घरेलू शिपिंग को बढ़ावा देने, नए जहाजों के निर्माण और लॉजिस्टिक्स सिस्टम को बेहतर बनाने की योजना पर काम किया जा रहा है।

बैठक में यह भी चर्चा हुई कि भारत को वैश्विक व्यापार में अपनी भूमिका और मजबूत करनी होगी। इसके लिए बंदरगाहों की क्षमता बढ़ाने, डिजिटल सिस्टम को लागू करने और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में समुद्री सुरक्षा और सप्लाई चेन की मजबूती बेहद जरूरी हो गई है। अगर भारत समय रहते अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करता है, तो वह किसी भी अंतरराष्ट्रीय संकट का बेहतर तरीके से सामना कर सकता है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ती चिंता ने भारत को अपनी समुद्री रणनीति पर तेजी से काम करने के लिए प्रेरित किया है। आने वाले समय में यह कदम देश की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार दोनों के लिए अहम साबित हो सकता है।

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