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गैर-यादव OBC पर सपा का फोकस, महिला नेतृत्व से NDA को घेरने की रणनीति में जुटे अखिलेश यादव

राजनीति | अनिल यादव | ABC NATIONAL NEWS | लखनऊ | 26 अप्रैल 2026

उत्तर प्रदेश की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर हलचल तेज़ हो गई है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव अब अपनी पारंपरिक MY (मुस्लिम-यादव) समीकरण के साथ साथ गैर-यादव पिछड़ा वर्ग (OBC) को साधने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। खास तौर पर कुर्मी, राजभर और निषाद जैसी जातियों पर पार्टी की नजर है, जिन्हें सत्ता के समीकरण में निर्णायक माना जा रहा है।राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में OBC वोट बैंक बेहद व्यापक और विविध है। लंबे समय से समाजवादी पार्टी का आधार यादव और मुस्लिम मतदाता रहे हैं, लेकिन सत्ता में वापसी के लिए पार्टी अब अन्य पिछड़े वर्गों को जोड़ने की कोशिश कर रही है। पहले भी सपा ने छोटे OBC दलों के साथ गठजोड़ कर इस आधार को मजबूत करने की कोशिश की थी।

इस बार रणनीति का एक अहम पहलू महिला नेतृत्व को आगे लाना भी है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि महिला मतदाताओं पर मजबूत पकड़ बनाकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को सीधी चुनौती दी जा सकती है। महिलाओं के मुद्दों—महंगाई, सुरक्षा और रोजगार—को लेकर सपा अलग नैरेटिव बनाने की तैयारी में है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि भी इस रणनीति को महत्वपूर्ण बनाती है। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार और बीजेपी ने पिछले चुनावों में व्यापक सामाजिक समीकरण बनाकर बड़ी जीत हासिल की थी। ऐसे में सपा के लिए केवल पारंपरिक वोट बैंक के सहारे चुनाव जीतना मुश्किल माना जा रहा है।

अखिलेश यादव की यह नई रणनीति ‘पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक (PDA)’ फार्मूले के विस्तार के रूप में भी देखी जा रही है, जिसके जरिए पार्टी अपने वोट आधार को व्यापक बनाना चाहती है। हालांकि, इस रास्ते में चुनौतियां भी कम नहीं हैं—विभिन्न जातीय समूहों के बीच संतुलन बनाना और स्थानीय नेतृत्व को मजबूत करना बड़ी परीक्षा होगी।

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यूपी की सियासत अब जातीय समीकरणों के नए दौर में प्रवेश कर रही है, जहां गैर-यादव OBC और महिला मतदाता चुनावी जीत की कुंजी बन सकते हैं। ऐसे में आने वाले महीनों में सपा और बीजेपी के बीच सीधा मुकाबला और भी दिलचस्प होने की संभावना है।

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