राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 24 अप्रैल 2026
दिल्ली की राजनीति में बड़ा बदलाव सामने आया है। आम आदमी पार्टी के 10 में से सात राज्यसभा सांसद अब आधिकारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए हैं। नई दिल्ली में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में राघव चड्ढा ने यह ऐलान किया और बताया कि वे अपने साथ अन्य सांसदों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी के साथ काम करेंगे। इस घटनाक्रम ने राजधानी से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक हलचल मचा दी है। राघव चड्ढा ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने कई बड़े फैसले लिए हैं, जिनसे देश मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि जनता ने इस नेतृत्व पर लगातार भरोसा जताया है और अब वे भी उसी दिशा में देशहित में काम करना चाहते हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व पर पूरा भरोसा है।
राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी पर भी गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना था कि पार्टी अब अपने मूल सिद्धांतों से भटक चुकी है और देशहित के बजाय निजी हितों पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि वे लंबे समय से खुद को “सही आदमी, गलत पार्टी में” महसूस कर रहे थे, इसलिए यह फैसला लिया। इस दौरान उन्होंने अरविंद केजरीवाल का जिक्र करते हुए उन्हें धन्यवाद भी दिया।
बीजेपी में शामिल होने वाले अन्य सांसदों में संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, विक्रम साहनी और राजिंदर गुप्ता के नाम सामने आए हैं। इन सभी नेताओं के एक साथ पार्टी बदलने से राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते दिख रहे हैं।
वहीं, संजय सिंह ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे “ऑपरेशन लोटस” का हिस्सा बताया और आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल कर नेताओं को तोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि जनता ऐसे कदमों को समझती है और समय आने पर जवाब देगी।
संवैधानिक पहलू पर बात करते हुए राघव चड्ढा ने कहा कि अगर किसी पार्टी के दो-तिहाई सांसद एक साथ दूसरी पार्टी में शामिल होते हैं, तो यह कानून के तहत वैध होता है और दल-बदल कानून लागू नहीं होता। उन्होंने बताया कि इस संबंध में राज्यसभा के सभापति को सभी जरूरी दस्तावेज सौंप दिए गए हैं।
अब यह घटनाक्रम सिर्फ एक राजनीतिक खबर नहीं रह गया है, बल्कि इससे देश की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है—क्या यह विचारधारा का बदलाव है या राजनीतिक मजबूरी? आने वाले समय में इसका असर और साफ दिखाई देगा।




