राष्ट्रीय राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 22 अप्रैल 2026
महिला आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस ने एक बार फिर मोदी सरकार पर जोरदार और सीधा हमला बोला है। पार्टी ने बेहद साफ शब्दों में कहा है कि 2023 में संसद से पास हो चुके महिला आरक्षण कानून को अब तक लागू न करना कोई मजबूरी नहीं, बल्कि एक सोची-समझी राजनीतिक चाल है। कांग्रेस के मुताबिक, देश की आधी आबादी—यानी महिलाओं—को उनका हक देने के नाम पर सिर्फ बड़े-बड़े वादे किए गए, लेकिन जब उसे लागू करने की बारी आई तो सरकार पीछे हट गई। पार्टी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पोस्टों और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए आरोप लगाया कि सरकार ने इस कानून को लागू करने के बजाय उसे परिसीमन से जोड़कर जानबूझकर टाल दिया, ताकि राजनीतिक फायदा लिया जा सके।
कांग्रेस ने अपने बयानों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि महिला आरक्षण बिल 2023 में सर्वसम्मति से पारित हुआ था, इसलिए अब इसे लागू करने में किसी तरह की देरी का कोई बहाना नहीं बनता। पार्टी का कहना है कि अगर सरकार सच में महिलाओं को उनका अधिकार देना चाहती, तो अब तक लोकसभा की 543 सीटों पर महिला आरक्षण लागू हो चुका होता। लेकिन इसके उलट, सरकार ने इसे परिसीमन के साथ जोड़कर उलझा दिया, जिससे असली फैसला आगे के लिए टल गया। कांग्रेस ने इसे महिलाओं के साथ “विश्वासघात” बताया और कहा कि यह केवल राजनीति करने का तरीका है, न कि महिलाओं को सशक्त बनाने की कोशिश।
इस पूरे मुद्दे पर कांग्रेस का रुख काफी आक्रामक नजर आ रहा है। पार्टी ने कहा कि मोदी सरकार महिला आरक्षण के नाम पर सिर्फ राजनीति कर रही है, जबकि असलियत यह है कि वह इसे तुरंत लागू करना ही नहीं चाहती। एक बयान में कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार महिलाओं के कंधे पर बंदूक रखकर अपना राजनीतिक एजेंडा पूरा करना चाहती है। वहीं दूसरे बयान में कहा गया कि महिला आरक्षण की आड़ में गलत तरीके से परिसीमन लागू करने की कोशिश की गई, जिसे विपक्ष की एकजुटता ने विफल कर दिया। कांग्रेस ने साफ कहा कि यह लोकतंत्र के खिलाफ एक साजिश थी, जिसका समय रहते जवाब दिया गया।
कांग्रेस ने अपनी मांग भी पूरी मजबूती के साथ रखी है। पार्टी बार-बार दो बातें दोहरा रही है—पहली, 2023 का महिला आरक्षण कानून तुरंत लागू किया जाए; और दूसरी, लोकसभा की सभी 543 सीटों पर महिलाओं को आरक्षण अभी दिया जाए। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि महिलाओं को उनका हक देने में अब एक दिन की भी देरी नहीं होनी चाहिए। पार्टी ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने इस कानून को करीब 30 महीनों तक लटकाए रखा और अब भी उसे लागू करने के बजाय नए-नए बहाने बना रही है। कांग्रेस का कहना है कि महिलाओं को केवल भाषणों में सम्मान देने से काम नहीं चलेगा, असली सम्मान तब होगा जब उन्हें संसद में बराबर की हिस्सेदारी मिलेगी।
इस पूरे अभियान में कांग्रेस ने देशभर की महिला नेताओं को आगे रखकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि यह मुद्दा केवल एक पार्टी का नहीं, बल्कि पूरे देश की महिलाओं का है। अलग-अलग राज्यों से नेताओं के बयान सामने लाकर पार्टी यह दिखाना चाहती है कि हर जगह एक ही मांग उठ रही है—महिला आरक्षण तुरंत लागू हो। कांग्रेस का कहना है कि उसने 2023 में इस बिल को पूरा समर्थन दिया था और आज भी उसी मजबूती के साथ इसके लागू होने की मांग कर रही है।
राजनीतिक रूप से कांग्रेस इस मुद्दे को केवल महिला अधिकार तक सीमित नहीं रख रही, बल्कि इसे सरकार की नीयत और भरोसे से जोड़ रही है। पार्टी का आरोप है कि बीजेपी एक तरफ महिलाओं के सम्मान की बात करती है, लेकिन दूसरी तरफ उन्हें असली अधिकार देने से पीछे हट जाती है। यही वजह है कि कांग्रेस ने इसे “आधी आबादी के साथ धोखा” करार दिया है। पार्टी का कहना है कि अब महिलाओं को सिर्फ वादे नहीं, बल्कि उनका अधिकार चाहिए और इसके लिए सरकार को जवाब देना होगा।
कांग्रेस ने महिला आरक्षण के मुद्दे को पूरी आक्रामकता के साथ उठाया है और सरकार पर सीधा दबाव बनाने की कोशिश की है। अब देखने वाली बात यह होगी कि बीजेपी और केंद्र सरकार इस पर क्या जवाब देती है और क्या यह विवाद आने वाले दिनों में और बड़ा रूप लेता है। फिलहाल इतना साफ है कि महिला आरक्षण अब केवल एक कानून नहीं, बल्कि देश की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुका है।




