शिक्षा / राष्ट्रीय | मोबनी मजूमदार| ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 7 जून 2026
नई दिल्ली। देश में हाल के महीनों में सामने आए विभिन्न परीक्षा विवादों, कथित अनियमितताओं और छात्रों की बढ़ती नाराजगी के बीच जंतर-मंतर पर आयोजित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के पहले बड़े प्रदर्शन को दिल्ली के विभिन्न विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के छात्रों का समर्थन मिला है। दिल्ली विश्वविद्यालय, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) और जामिया मिल्लिया इस्लामिया सहित कई शिक्षण संस्थानों के छात्र इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। हालांकि अधिकांश छात्रों ने स्पष्ट किया कि वे शिक्षा व्यवस्था में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग का समर्थन कर रहे हैं, लेकिन CJP के राजनीतिक एजेंडे और भविष्य की दिशा को लेकर अभी भी सतर्क हैं।
प्रदर्शन में शामिल छात्रों का कहना है कि पिछले कुछ समय से विभिन्न राष्ट्रीय परीक्षाओं को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। पेपर लीक, डेटा सुरक्षा, परीक्षा प्रबंधन और पारदर्शिता जैसे मुद्दों ने छात्रों के बीच असंतोष पैदा किया है। ऐसे माहौल में जंतर-मंतर पर हुआ यह प्रदर्शन केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि युवाओं की नाराजगी का प्रतीक बनकर सामने आया। कई छात्रों ने कहा कि वे किसी राजनीतिक दल के समर्थन में नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और सुधार की मांग को लेकर प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे थे।
दिल्ली के विभिन्न छात्र संगठनों ने भी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग का समर्थन किया, लेकिन साथ ही उन्होंने CJP से दूरी बनाए रखने के संकेत दिए। कुछ छात्र नेताओं का मानना है कि आंदोलन के पीछे व्यापक राजनीतिक उद्देश्य भी हो सकते हैं, इसलिए किसी संगठन के साथ पूरी तरह जुड़ने से पहले उसकी नीतियों और उद्देश्यों को समझना जरूरी है। छात्रों का कहना है कि उनकी प्राथमिक चिंता शिक्षा, रोजगार और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली है, न कि किसी राजनीतिक मंच का विस्तार।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने महात्मा ज्योतिराव फुले, डॉ. भीमराव अंबेडकर और शिक्षा सुधार से जुड़े कई सामाजिक विचारकों के चित्र और संदेश भी प्रदर्शित किए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था में लगातार सामने आ रही समस्याओं का समाधान करने के बजाय सरकार उन्हें नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने मांग की कि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाया जाए, डेटा सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और परीक्षा संबंधी विवादों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
इस आंदोलन ने यह भी दिखाया है कि शिक्षा और रोजगार के मुद्दे अब केवल कैंपस तक सीमित नहीं रहे हैं। बड़ी संख्या में युवा अपनी चिंताओं को लेकर सार्वजनिक मंचों पर आवाज उठाने लगे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि परीक्षा और शिक्षा से जुड़े विवाद लगातार बढ़ते रहे, तो यह आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति का महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है। खासकर तब, जब करोड़ों छात्र और उनके परिवार सीधे तौर पर इन परीक्षाओं और शिक्षा नीतियों से प्रभावित होते हैं।
फिलहाल CJP ने चेतावनी दी है कि यदि शिक्षा मंत्री को नहीं हटाया गया और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आंदोलन को देशव्यापी स्तर पर ले जाया जाएगा। वहीं दूसरी ओर सरकार और शिक्षा मंत्रालय की ओर से अभी तक इस प्रदर्शन को लेकर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन इतना साफ है कि जंतर-मंतर पर शुरू हुआ यह आंदोलन अब केवल एक संगठन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवाओं के बढ़ते असंतोष की एक महत्वपूर्ण अभिव्यक्ति बनता जा रहा है।




