व्यापार / अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | 15 अप्रैल 2026
मध्य-पूर्व में ईरान को लेकर जारी युद्ध अब केवल सैन्य टकराव तक सीमित नहीं रहा है बल्कि इसने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को सीधे-सीधे झकझोरना शुरू कर दिया है और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF ने साफ-साफ चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर यह संघर्ष और बढ़ता गया तो वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी के कगार पर पहुंच सकती है क्योंकि तेल बाजार में हो रही बाधा अब हर देश को महंगाई और विकास दर में गिरावट के रूप में झेलनी पड़ रही है। IMF की ताजा रिपोर्ट में यह स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि मौजूदा संकट की वजह से पहले ही वैश्विक आर्थिक वृद्धि के अनुमान काफी नीचे कर दिए गए हैं और अगर हालात बिगड़ते रहे तथा तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल या उससे ऊपर बनी रहीं तो साल 2026 में वैश्विक विकास दर महज 2 प्रतिशत तक सिमट सकती है जो सीधे-सीधे मंदी जैसे हालात पैदा कर देगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरी उथल-पुथल की जड़ ऊर्जा आपूर्ति में आई भारी बाधा है जहां हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से होकर जाने वाले दुनिया के बड़े हिस्से के तेल पर युद्ध की छाया पड़ने से सप्लाई चेन पूरी तरह से प्रभावित हो गई है जिसके कारण न सिर्फ ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं बल्कि परिवहन उद्योग खाद्य उत्पादन और रोजमर्रा की हर चीज पर इसका असर दिखाई दे रहा है।
IMF ने अपनी रिपोर्ट में यह भी साफ कर दिया है कि मौजूदा हालात सबसे खराब स्थिति की ओर बढ़ सकते हैं जहां लंबे समय तक चला युद्ध और ऊंची तेल कीमतें मिलकर वैश्विक अर्थव्यवस्था की रफ्तार को पूरी तरह तोड़ सकते हैं और इस स्थिति में महंगाई 6 प्रतिशत तक पहुंच सकती है जिससे कई देशों को भारी आर्थिक झटके लगेंगे। रिपोर्ट के मुताबिक विकसित देशों से लेकर उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं तक हर जगह इसका प्रभाव पड़ेगा लेकिन खासतौर पर उन देशों पर खतरा ज्यादा बड़ा है जो तेल आयात पर निर्भर हैं क्योंकि उनके लिए ऊर्जा की महंगाई का बोझ बर्दाश्त करना और भी मुश्किल हो जाएगा। वैश्विक बाजारों में पहले से ही अस्थिरता का माहौल है निवेशक घबराए हुए हैं और महंगाई का दबाव हर तरफ दिखाई दे रहा है जिससे कंपनियां और सरकारें दोनों ही नई चुनौतियों का सामना कर रही हैं। IMF ने सभी देशों को सलाह दी है कि वे जल्दबाजी में बड़े-बड़े आर्थिक पैकेज या अनियोजित सब्सिडी देने से बचें क्योंकि पहले से ही बढ़ता कर्ज और महंगाई की स्थिति को और बिगाड़ सकता है इसलिए लक्षित उपायों पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है।
स्पष्ट है कि ईरान युद्ध अब सिर्फ क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रह गया है बल्कि यह वैश्विक आर्थिक संकट में बदलने की पूरी क्षमता रखता है और अगर कूटनीतिक समाधान जल्दी नहीं निकला तो आने वाले महीनों में पूरी दुनिया को एक और बड़ी आर्थिक उथल-पुथल का सामना करना पड़ सकता है। तेल संकट की वजह से पहले ही कई उद्योगों की उत्पादन लागत बढ़ गई है जिसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है और विकासशील देशों में खाद्य सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं बढ़ती जा रही हैं। IMF की रिपोर्ट में जो आंकड़े दिए गए हैं वे बताते हैं कि बिना किसी त्वरित हस्तक्षेप के यह संकट कितना गहरा हो सकता है इसलिए दुनिया के नेताओं को अब सिर्फ युद्ध रोकने की कोशिश नहीं बल्कि आर्थिक बचाव की रणनीति भी बनानी होगी ताकि मंदी का साया पूरी तरह से टाला जा सके। कुल मिलाकर यह संकट हमें याद दिलाता है कि आज की दुनिया में एक क्षेत्र का युद्ध कितनी दूर तक आर्थिक लहरें पैदा कर सकता है और हर देश को अपनी ऊर्जा नीतियों को फिर से सोचने की जरूरत है।




