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नेपाल में दलितों से माफी के मुद्दे पर यू-टर्न: बालेन शाह ने लिया फैसला वापस

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अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | काठमांडू | 14 अप्रैल 2026

नेपाल की राजनीति में दलित समुदाय से माफी को लेकर शुरू हुआ संवेदनशील मुद्दा अब नए विवाद का रूप लेता जा रहा है। काठमांडू के मेयर Balen Shah ने पहले दलित समुदाय से ऐतिहासिक माफी मांगने का प्रस्ताव रखा था, जिसे एक सकारात्मक और साहसिक कदम माना जा रहा था। लेकिन अब उन्होंने इस फैसले से अचानक पीछे हटते हुए इसे चुपचाप वापस ले लिया है, जिससे राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

बताया जा रहा है कि यह प्रस्ताव नेपाल के सामाजिक ढांचे में व्याप्त जातिगत भेदभाव को स्वीकार करते हुए दलितों के प्रति संवेदनशीलता दिखाने के उद्देश्य से लाया गया था। इस कदम को देश में समानता और सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा था। हालांकि, फैसले के अचानक पलटने से यह संदेश गया है कि नेतृत्व इस मुद्दे पर स्पष्ट और स्थिर रुख अपनाने में असमर्थ दिखाई दे रहा है।

इस पूरे मामले में Rabi Lamichhane के बयान ने भी राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। उन्होंने सार्वजनिक मंच से इस यू-टर्न की आलोचना करते हुए कहा कि दलित समुदाय के साथ न्याय केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि ठोस फैसलों और प्रतिबद्धता से होता है। उनके अनुसार, इस तरह का निर्णय वापस लेना न केवल निराशाजनक है, बल्कि इससे समाज में गलत संदेश भी जाता है।

नेपाल में दलित समुदाय लंबे समय से सामाजिक और आर्थिक भेदभाव का सामना करता रहा है। ऐसे में माफी का प्रस्ताव प्रतीकात्मक रूप से बेहद महत्वपूर्ण था, जो ऐतिहासिक अन्याय को स्वीकार करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा था। लेकिन अब इस फैसले के वापस लेने से दलित संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ गई है। कई संगठनों ने इसे विश्वासघात करार देते हुए सरकार से स्पष्ट जवाब की मांग की है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह यू-टर्न दबाव की राजनीति का परिणाम हो सकता है। संभव है कि कुछ वर्गों या राजनीतिक समूहों के विरोध के चलते यह निर्णय वापस लिया गया हो। हालांकि, आधिकारिक तौर पर इस पर कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है, जिससे स्थिति और अधिक उलझती नजर आ रही है। यह मुद्दा नेपाल की राजनीति में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार या संबंधित नेतृत्व इस विवाद पर क्या रुख अपनाता है और क्या दलित समुदाय के विश्वास को दोबारा जीतने के लिए कोई ठोस कदम उठाया जाता है।

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