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वेस्ट एशिया तनाव : कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर महंगा, कारोबारियों पर बढ़ा दबाव

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 1 अप्रैल 2026

वेस्ट एशिया में जारी तनाव का असर अब सीधे आम जीवन और कारोबार पर दिखने लगा है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के बीच 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल दर्ज किया गया है। राजधानी दिल्ली में इस सिलेंडर की कीमत बढ़कर 2,078.50 रुपये पहुंच गई है, जो कुछ घंटे पहले तक करीब 1,883 रुपये थी। यानी एक झटके में लगभग 195.50 रुपये की वृद्धि ने होटल, रेस्तरां और छोटे व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है। मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे महानगरों में भी इसी अनुपात में दाम बढ़े हैं, जिससे साफ है कि यह असर देशव्यापी है और केवल किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है।

तेल विपणन कंपनियों ने इस बढ़ोतरी के पीछे वेस्ट एशिया की स्थिति और खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ हरमुज से जुड़ी आपूर्ति चिंताओं को प्रमुख कारण बताया है। यह क्षेत्र वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का एक अहम मार्ग माना जाता है, और यहां किसी भी प्रकार का तनाव अंतरराष्ट्रीय कीमतों को तुरंत प्रभावित करता है। कंपनियों का कहना है कि कच्चे तेल और गैस की वैश्विक कीमतों में आए उछाल का सीधा असर एलपीजी दरों पर पड़ा है, जिसे घरेलू बाजार में समायोजित करना पड़ा।

हालांकि, राहत की बात यह है कि घरेलू उपयोग वाले 14.2 किलोग्राम एलपीजी सिलेंडर की कीमत में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। दिल्ली में यह अभी भी 913 रुपये पर स्थिर है। सरकार की उज्ज्वला योजना के तहत लाभार्थियों को 300 रुपये प्रति सिलेंडर की सब्सिडी जारी है, जिससे उन्हें अपेक्षाकृत कम कीमत पर गैस उपलब्ध हो रही है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि देश में एलपीजी की आपूर्ति पर्याप्त है और किसी प्रकार की घबराहट या जमाखोरी की आवश्यकता नहीं है।

इसके बावजूद बाजार में असर साफ दिखाई देने लगा है। होटल, ढाबा, रेस्तरां और छोटे खाने-पीने के व्यवसाय से जुड़े लोग इस बढ़ोतरी को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि लगातार बढ़ती कीमतों से लागत बढ़ रही है, जिसका बोझ अंततः ग्राहकों पर डालना मजबूरी बन जाता है। पिछले महीने मार्च 2026 में भी कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में 114.50 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी, और साल की शुरुआत से अब तक कुल वृद्धि काफी अधिक हो चुकी है। कुछ इलाकों में आपूर्ति को लेकर दबाव और कालाबाजारी की शिकायतें भी सामने आई हैं, जिस पर सरकार ने राज्यों को सख्ती बरतने के निर्देश दिए हैं।

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि एलपीजी की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क, खासकर सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस से जुड़ी होती हैं, इसलिए वैश्विक हालात का असर सीधे भारत जैसे आयात-निर्भर देश पर पड़ता है। सरकार का कहना है कि उसने कच्चे तेल के आयात स्रोतों में विविधता लाई है और रूस सहित अन्य देशों से आयात बढ़ाया है, साथ ही घरेलू उत्पादन को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके बावजूद वैश्विक अस्थिरता के दौर में कीमतों को पूरी तरह नियंत्रित कर पाना आसान नहीं है।

राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे ने जोर पकड़ लिया है। विपक्ष इसे केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों की विफलता बता रहा है, जबकि सरकार का तर्क है कि यह पूरी तरह वैश्विक परिस्थितियों का परिणाम है। सच्चाई यह है कि आम आदमी से लेकर छोटे कारोबारी तक, हर वर्ग इस बढ़ती महंगाई का असर महसूस कर रहा है।

आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि क्या अंतरराष्ट्रीय हालात में स्थिरता आती है या फिर एलपीजी समेत अन्य ईंधनों की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। फिलहाल, आज की इस बढ़ोतरी ने यह साफ कर दिया है कि भारत जैसे देश के लिए ऊर्जा सुरक्षा और कीमत नियंत्रण दोनों ही बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं।

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