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NATO छोड़ने की धमकी! ट्रंप का ऐलान—अब अमेरिका किसी का बोझ नहीं उठाएगा

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन | 1 अप्रैल 2026

ईरान युद्ध पर साथ न देने से भड़के ट्रंप, पश्चिमी गठबंधन में दरार

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने एक बार फिर वैश्विक राजनीति में ऐसा बयान दे दिया है, जिसने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है। इस बार निशाने पर है दुनिया का सबसे ताकतवर सैन्य गठबंधन—NATO। ट्रंप ने बेहद सख्त लहजे में साफ कर दिया है कि अमेरिका अब NATO से बाहर निकलने के फैसले पर “सिर्फ विचार” नहीं कर रहा, बल्कि उस दिशा में गंभीरता से आगे बढ़ चुका है। यह बयान केवल कूटनीतिक दबाव नहीं, बल्कि एक बड़े भू-राजनीतिक बदलाव का संकेत माना जा रहा है।

ट्रंप की नाराज़गी की जड़ सीधे-सीधे ईरान युद्ध से जुड़ी है। अमेरिका और इजरायल को जिस तरह का सैन्य और रणनीतिक समर्थन अपने सहयोगी देशों से चाहिए था, वह नहीं मिला। यूरोप के कई बड़े देश—खासतौर पर NATO सदस्य—या तो इस संघर्ष से दूरी बनाए रहे या खुलकर समर्थन देने से बचते नजर आए। इसी पर भड़के ट्रंप ने साफ शब्दों में कह दिया कि अमेरिका अब “दूसरों की लड़ाई लड़ने और उनका खर्च उठाने” के लिए तैयार नहीं है। उनका यह बयान सिर्फ गुस्से का इज़हार नहीं, बल्कि एक नई अमेरिकी नीति की झलक भी देता है।

ट्रंप ने NATO को “कमजोर और बेअसर” बताते हुए यह संकेत भी दिया कि अगर सहयोगी देश संकट के समय अमेरिका के साथ नहीं खड़े होंगे, तो अमेरिका भी उनकी सुरक्षा की गारंटी देने के लिए बाध्य नहीं रहेगा। यह सीधा-सीधा उस मूल सिद्धांत को चुनौती है, जिस पर NATO खड़ा है—यानी एक देश पर हमला, सभी पर हमला। ट्रंप का यह रुख बताता है कि वह इस सिद्धांत को अब एकतरफा बोझ मानने लगे हैं।

इस बयान के बाद यूरोप में हलचल तेज हो गई है। NATO की असली ताकत हमेशा से अमेरिका की सैन्य क्षमता और उसकी प्रतिबद्धता रही है। अगर अमेरिका पीछे हटता है, तो यह गठबंधन सिर्फ नाम का रह जाएगा। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ NATO के लिए नहीं, बल्कि पूरे पश्चिमी सुरक्षा ढांचे के लिए सबसे बड़ा खतरा बन सकता है। रूस और चीन जैसे देशों के लिए यह स्थिति एक रणनीतिक अवसर भी साबित हो सकती है।

गौरतलब है कि ट्रंप पहले भी NATO देशों पर “फ्री राइडिंग” का आरोप लगाते रहे हैं—यानी सुरक्षा का फायदा उठाना लेकिन उसका खर्च न उठाना। वह लगातार सदस्य देशों से रक्षा बजट बढ़ाने की मांग करते रहे हैं। लेकिन इस बार उनका लहजा पहले से कहीं ज्यादा आक्रामक है और इसमें चेतावनी के साथ-साथ कार्रवाई की झलक भी साफ दिखाई दे रही है।

सबसे बड़ा सवाल अब यही है—क्या यह सिर्फ दबाव बनाने की रणनीति है या वाकई अमेरिका NATO से बाहर निकलने की दिशा में कदम बढ़ा चुका है? अगर ऐसा होता है, तो यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बने वैश्विक गठबंधनों के इतिहास का सबसे बड़ा झटका होगा, जिसका असर यूरोप से लेकर एशिया और मध्य-पूर्व तक देखने को मिलेगा।

ट्रंप का यह बयान साफ कर देता है कि अमेरिका अब “पुराने नियमों” से खेलने के मूड में नहीं है। उनका संदेश साफ है—“साथ दो, वरना हम अलग।” आने वाले दिनों में यह तय होगा कि यह सिर्फ सख्त बयानबाजी है या फिर दुनिया एक नए भू-राजनीतिक दौर की शुरुआत देखने जा रही है।

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