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मोदी की कायरता ने पूरे देश को LPG संकट में डुबो दिया, क्या अमेरिका के पास पीएम का कोई गुप्त राज है? : पवन खेड़ा

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई हेडलाइन | 23 मार्च 2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कायरता और अमेरिका के सामने घुटने टेकने की नीति ने देश को गंभीर LPG संकट में झोंक दिया है। जहां से भारत की 85-90 प्रतिशत LPG आयात होती थी, वो स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज का रास्ता ईरान द्वारा पूरी तरह बंद कर दिया गया है। अमेरिका – इजराइल के हमलों के जवाब में ईरान ने फरवरी के अंत में इस महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य को बंद कर दिया, जिससे कतर, सऊदी अरब, UAE और कुवैत से आने वाली गैस की सप्लाई ठप हो गई। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG आयातक देश है, जहां सालाना 31 मिलियन टन LPG की खपत होती है। इसमें से 60-62 प्रतिशत आयात पर निर्भर, और उसमें से 85-90 प्रतिशत इसी हॉर्मुज रूट से गुजरता है। अब स्टॉक सिर्फ 10 दिनों का बचा है, घरों में सिलिंडर की लंबी कतारें लग रही हैं, रेस्तरां और होटल बंद हो रहे हैं, और पैनिक बुकिंग से स्थिति और बिगड़ गई है। यह कहना है कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता पवन खेड़ा का।

कांग्रेस नेता पवन खेरा ने प्रधानमंत्री मोदी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा, “नरेंद्र मोदी की कायरता ने पूरे देश को संकट में डाल दिया है। जहां से 85 प्रतिशत गैस आता था, वो रास्ता ही बंद हो गया। देश जानना चाहता है कि नरेंद्र मोदी के ऐसे कौन से सीक्रेट अमेरिका के पास हैं कि वे देशहित में सोचना भी बंद कर चुके हैं।” खेरा ने आगे कहा कि श्रीलंका तो अमेरिका को आंख में आंख डालकर कह देता है कि हम अपनी बेस नहीं देंगे, लेकिन मोदी जी में इतनी हिम्मत भी नहीं कि कुछ बोल सकें। उन्होंने साफ कहा कि मोदी सरकार ने अमेरिका-इजराइल के ईरान पर हमलों की निंदा तक नहीं की, जबकि ये हमले ही हॉर्मुज बंद होने का कारण बने। अब देशभर में LPG संकट फैल रहा है – घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 25 दिन का अंतर अनिवार्य कर दिया गया, कमर्शियल सिलिंडर बंद, और कीमतें बढ़ रही हैं।

सरकार चाहे जितना दावा करे कि “कोई पैनिक नहीं”, हकीकत कुछ और कह रही है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने घरेलू उत्पादन बढ़ाने, US से 1 मिलियन टन LPG मंगाने और वैकल्पिक रूट की बात की है, लेकिन हकीकत ये है कि हॉर्मुज बंद होने से 25-30 प्रतिशत गैस सप्लाई प्रभावित हुई है। क्रूड ऑयल का 50 प्रतिशत और LNG का 50-55 प्रतिशत भी इसी रूट पर आता है। विपक्ष पूछ रहा है – जब मोदी अमेरिका के “बहुत अच्छे दोस्त” बनकर घूम रहे थे, तब क्यों नहीं ईरान पर हमलों को रोका? क्यों नहीं हॉर्मुज की स्वतंत्र नेविगेशन की मांग पहले की? क्या अमेरिका के पास मोदी का कोई ऐसा राज है कि वे राष्ट्रीय हित को ताक पर रखकर चुप बैठे हैं? डिग्विजय सिंह जैसे नेताओं ने भी कहा है कि 21 दिन हो गए हमलों को, लेकिन मोदी ने न तो निंदा की, न सीजफायर की मांग की।

यह संकट सिर्फ LPG का नहीं, बल्कि मोदी की विदेश नीति की कायरता का जीता-जागता सबूत है। जहां पूरी दुनिया ऊर्जा संकट झेल रही है, वहां भारत जैसे देश को सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है क्योंकि हमारी 85 प्रतिशत LPG इसी रास्ते पर निर्भर थी। पवन खेरा का सवाल देश का सवाल है – आखिर मोदी अमेरिका के इतने गुलाम क्यों बन गए कि देश की रसोई जलने लगी तो भी चुप हैं? जनता अब जवाब मांग रही है। अगर यह कायरता नहीं तो और क्या है? देश अब और नहीं सह सकता – मोदी सरकार को तुरंत जवाब देना होगा वरना यह LPG संकट चुनावी हार बनकर सामने आएगा!

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