टेक्नोलॉजी | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन | 21 मार्च 2026
दुनिया तेजी से बदल रही है और ऊर्जा की जरूरतें हर दिन बढ़ रही हैं। ऐसे समय में एलन मस्क ने एक ऐसा दावा किया है, जिसने ऊर्जा क्षेत्र में नई बहस छेड़ दी है। उनका कहना है कि अगर सही तरीके से सोलर पावर का इस्तेमाल किया जाए, तो संयुक्त राज्य अमेरिका की पूरी बिजली की जरूरत सिर्फ सूरज की रोशनी से पूरी की जा सकती है। खास बात यह है कि उन्होंने यह बात ऐसे समय में कही है जब डेटा सेंटर की संख्या और उनकी बिजली की खपत तेजी से बढ़ रही है। आज इंटरनेट, क्लाउड और डिजिटल सेवाओं का पूरा ढांचा इन डेटा सेंटर पर टिका हुआ है, और यही सेंटर सबसे ज्यादा बिजली खपत करते हैं। मस्क का मानना है कि आने वाले समय में इस बढ़ती मांग को भी सोलर एनर्जी से पूरा किया जा सकता है।
इसी के साथ Tesla ने अपने प्लान का संकेत भी दे दिया है। कंपनी की वेबसाइट पर जारी जॉब पोस्टिंग के मुताबिक Tesla का लक्ष्य है कि वह 2028 तक अमेरिका में ही कच्चे माल से लेकर तैयार सोलर सिस्टम तक—पूरी मैन्युफैक्चरिंग चेन तैयार करे और करीब 100 गीगावाट (GW) की क्षमता हासिल करे। इसे आसान शब्दों में समझें तो यह इतनी बड़ी क्षमता है कि इससे करोड़ों घरों और हजारों उद्योगों को बिजली दी जा सकती है। यह सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि पूरी ऊर्जा व्यवस्था को बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
मस्क की सोच साफ है—ऊर्जा का भविष्य साफ, सस्ता और स्थानीय होना चाहिए। अगर सोलर मैन्युफैक्चरिंग अमेरिका में ही होगी, तो न सिर्फ रोजगार बढ़ेगा बल्कि दूसरे देशों पर निर्भरता भी कम होगी। साथ ही, ट्रांसपोर्ट और आयात से जुड़े खर्च भी घटेंगे। यही वजह है कि Tesla सिर्फ सोलर पैनल बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि वह पूरी सप्लाई चेन को अपने नियंत्रण में रखना चाहती है—यानी कच्चे माल से लेकर फाइनल प्रोडक्ट तक सब कुछ देश के अंदर तैयार हो।
हालांकि, यह रास्ता इतना आसान भी नहीं है। इतनी बड़ी क्षमता तक पहुंचने के लिए भारी निवेश, जमीन, तकनीक और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होगी। साथ ही, सोलर एनर्जी की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यह दिन के समय ही काम करती है, इसलिए इसके साथ बैटरी स्टोरेज और ग्रिड मैनेजमेंट को भी मजबूत करना होगा। लेकिन मस्क पहले भी ऐसे बड़े और मुश्किल प्रोजेक्ट्स को हकीकत में बदल चुके हैं, इसलिए उनकी इस योजना को हल्के में नहीं लिया जा रहा।
अगर यह योजना सफल होती है, तो इसका असर सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा। पूरी दुनिया में साफ ऊर्जा की दिशा में यह एक बड़ा उदाहरण बन सकता है। तेल और कोयले पर निर्भरता कम होगी, प्रदूषण घटेगा और ऊर्जा की कीमतों में भी स्थिरता आ सकती है। कुल मिलाकर, मस्क का यह दावा सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि आने वाले समय की एक झलक माना जा रहा है—जहां सूरज ही दुनिया का सबसे बड़ा ऊर्जा स्रोत बन सकता है।




