एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 2 मार्च 2026
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान के सर्वोच्च नेता पर हुए हमले के बाद देश की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर सीधा और आक्रामक हमला बोलते हुए कहा है कि इस गंभीर अंतरराष्ट्रीय संकट पर भारत की चुप्पी चिंताजनक है। पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि “इतिहास कभी नहीं भूलेगा” कि जब दुनिया अशांति के दौर से गुजर रही थी, तब भारत की ओर से स्पष्ट शब्दों में निंदा नहीं आई।
पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने इज़रायल की संसद में अपने दौरे के दौरान प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ सार्वजनिक रूप से नज़दीकी दिखाई थी, लेकिन अब जब हालात गंभीर हो गए हैं, तो सरकार चुप है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में ताज़ा घटनाओं ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है, फिर भी भारत की ओर से हमले की स्पष्ट आलोचना सामने नहीं आई है।
खेड़ा ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत को हमेशा नैतिक नेतृत्व और संतुलित कूटनीति के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन इस मामले में वह छवि कमजोर होती दिख रही है। उन्होंने कहा, “मोदी अब इस हमले की निंदा करने का साहस भी नहीं दिखा पा रहे हैं। पश्चिम एशिया ही नहीं, पूरी दुनिया अंधेरे में धकेली जा रही है।” कांग्रेस के अनुसार, यह स्थिति भारत की अंतरराष्ट्रीय साख और उसके नैतिक रुख पर सवाल खड़े करती है।
कांग्रेस ने अमेरिका और इज़रायल की भूमिका को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि मौजूदा हालात वैश्विक शांति के लिए गंभीर खतरा हैं। पार्टी का कहना है कि भारत को इस समय शांति, संवाद और संयम की आवाज बनना चाहिए था, लेकिन सरकार की चुप्पी ने उलटे सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस बीच संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदक बालाकृष्णन राजगोपाल ने भी अमेरिका और इज़रायल की सैन्य कार्रवाइयों पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि ऐसे कदम विश्व शांति और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र के अन्य नेताओं ने भी सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत की राह अपनाने की अपील की है।
हालांकि केंद्र सरकार की ओर से अब तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है। विदेश नीति के जानकारों का कहना है कि भारत अक्सर ऐसे संवेदनशील मामलों में संतुलित और सोच-समझकर प्रतिक्रिया देता है, ताकि कूटनीतिक संबंध प्रभावित न हों।
फिलहाल, खामेनेई पर हमले और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार कब और किस रूप में अपना आधिकारिक रुख सामने रखती है।




