अंतरराष्ट्रीय / कल्चर / एजुकेशन| महेंद्र सिंह | ABC NATIONAL NEWS । नई दिल्ली / न्यूयॉर्क। 2 मई 2026
भारत की खोई हुई सांस्कृतिक विरासत एक बार फिर अपने घर लौट आई है। अमेरिका ने भारत को 657 प्राचीन कलाकृतियां लौटाईं, जिनकी कुल कीमत करीब 14 मिलियन डॉलर आंकी गई है। यह सिर्फ वस्तुओं की वापसी नहीं, बल्कि इतिहास, आस्था और पहचान की वापसी मानी जा रही है। इन प्राचीन वस्तुओं में मूर्तियां, धार्मिक प्रतिमाएं, धातु और पत्थर से बनी कलाकृतियां शामिल हैं, जो अलग-अलग समय में भारत से अवैध रूप से बाहर ले जाई गई थीं। कई कलाकृतियां सदियों पुरानी हैं और भारतीय सभ्यता की गहरी जड़ों को दर्शाती हैं। इनकी वापसी से न सिर्फ संग्रहालयों को मजबूती मिलेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियां भी अपने इतिहास से सीधे जुड़ सकेंगी।
न्यूयॉर्क में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान इन धरोहरों को औपचारिक रूप से भारत को सौंपा गया। इस अवसर पर भारत के महावाणिज्य दूतावास से Rajlakshmi Kadam भी मौजूद रहीं। उन्होंने इस पहल को भारत-अमेरिका के बीच मजबूत होते सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक बताया और कहा कि यह कदम दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग को और गहरा करता है।
यह पहली बार नहीं है जब भारत को अपनी चोरी या तस्करी हुई धरोहरें वापस मिली हैं, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में एक साथ वापसी ने इसे खास बना दिया है। पिछले कुछ वर्षों में भारत सरकार और एजेंसियों ने विदेशों में मौजूद अपनी ऐतिहासिक वस्तुओं को वापस लाने के लिए लगातार प्रयास तेज किए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की वापसी न केवल सांस्कृतिक संरक्षण के लिए जरूरी है, बल्कि यह अवैध पुरावशेष तस्करी के खिलाफ एक मजबूत संदेश भी देती है। इससे यह साफ होता है कि अब दुनिया भर में इस तरह की गतिविधियों पर सख्ती बढ़ रही है और देशों के बीच सहयोग भी मजबूत हो रहा है।
इन धरोहरों के भारत लौटने से न सिर्फ संग्रहालय समृद्ध होंगे, बल्कि देश की सांस्कृतिक पहचान भी और मजबूत होगी। यह एक ऐसा क्षण है, जो बताता है कि इतिहास भले ही कहीं खो जाए, लेकिन उसे वापस लाने की कोशिशें कभी बेकार नहीं जातीं।




