एबीसी नेशनल न्यूज | 8 फरवरी 2026
कांग्रेस से बाहर होने के बाद नवजोत कौर सिद्धू के बदले हुए तेवरों ने पंजाब की राजनीति में सियासी भूचाल ला दिया है। पार्टी से पहले निलंबन और फिर निष्कासन के बाद नवजोत कौर सिद्धू ने सोशल मीडिया के ज़रिए कांग्रेस नेतृत्व पर सीधा हमला बोला और Rahul Gandhi को खुलेआम ‘पप्पू’ कह दिया। इस बयान के साथ ही यह सवाल तेज़ हो गया है कि क्या नवजोत सिंह सिद्धू एक बार फिर Bharatiya Janata Party में ‘घर वापसी’ की तैयारी कर रहे हैं।
कांग्रेस में रहते हुए नवजोत सिंह सिद्धू और नवजोत कौर सिद्धू सत्ता के केंद्र में रहे। सरकार बनी तो मंत्री पद, राजनीतिक प्रभाव और सत्ता की पूरी मलाई दोनों ने जमकर खाई। लेकिन जैसे ही कांग्रेस की सरकार गई और पार्टी को विपक्ष की बेंचों पर बैठना पड़ा, वैसे ही सिद्धू दंपति का रुख पूरी तरह बदल गया। पहले पार्टी पर आरोप लगाए गए, फिर अनुशासनात्मक कार्रवाई हुई—और उसके बाद राहुल गांधी पर व्यक्तिगत हमलों का सिलसिला शुरू हो गया।
नवजोत कौर सिद्धू ने अपने बयान में दावा किया कि राहुल गांधी ज़मीनी हकीकत से कटे हुए हैं और कांग्रेस चंद लोगों के हाथों में सिमट कर रह गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में सत्ता का सुख कुछ खास लोगों तक सीमित है और आम कार्यकर्ताओं की अनदेखी की जा रही है। हालांकि, कांग्रेस खेमे का कहना है कि यह बयान विचारधारा नहीं, बल्कि कुर्सी छिन जाने की हताशा का नतीजा है।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक यह पूरा घटनाक्रम किसी अचानक उपजे गुस्से का नहीं, बल्कि एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है। नवजोत कौर सिद्धू द्वारा लगातार बीजेपी और प्रधानमंत्री की प्रशंसा तथा कांग्रेस नेतृत्व पर तीखे हमले इस ओर इशारा कर रहे हैं कि सिद्धू परिवार सत्ता की नई राह तलाश रहा है। यह भी याद दिलाया जा रहा है कि नवजोत सिंह सिद्धू ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत बीजेपी से ही की थी।
कांग्रेस नेताओं ने इस पूरे प्रकरण को एहसान-फरामोशी और अवसरवाद करार दिया है। उनका कहना है कि जब तक सत्ता थी, तब तक सिद्धू दंपति कांग्रेस की छत्रछाया में सुरक्षित रहा, लेकिन सत्ता जाते ही वही पार्टी बोझ बन गई। जिनके नेतृत्व में पद और पहचान मिली, उन्हीं को आज अपमानजनक शब्दों से नवाज़ा जा रहा है।
फिलहाल न तो बीजेपी और न ही सिद्धू परिवार की ओर से किसी औपचारिक जॉइनिंग की घोषणा हुई है, लेकिन पंजाब की राजनीति में यह बहस तेज़ हो चुकी है कि यह वैचारिक परिवर्तन है या सिर्फ़ सत्ता की तलाश में बदला गया पाला।




