[the_ad id="179"]
Home » National » ओपिनियन | अनुशासन की राह पर कांग्रेस? सिद्धू दंपत्ति पर एक्शन से थरूर के बदले रुख !!

ओपिनियन | अनुशासन की राह पर कांग्रेस? सिद्धू दंपत्ति पर एक्शन से थरूर के बदले रुख !!

एबीसी डेस्क 19 दिसंबर 2025

कांग्रेस अगर पार्टी के अंदर अनुशासन मजबूत कर ले, तो उसके फिर से खड़े होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। पार्टी के सामने असली चुनौती वही नेता रहे हैं जो कांग्रेस में रहकर पार्टी लाइन के खिलाफ बयानबाजी करते रहे। कई बार ऐसे नेताओं को RSS–BJP के “स्लीपर सेल” के तौर पर भी देखा गया, जो अंदर रहकर नुकसान पहुंचाते रहे। पंजाब में 500 करोड़ की अटैची वाले बयान पर जिस तेजी से कार्रवाई हुई, उसके बाद ऐसे कई नेता फिलहाल ट्रैक पर आते दिखाई दे रहे हैं।

इसी बदले हुए माहौल के बीच कांग्रेस नेता शशि थरूर द्वारा राहुल गांधी की मनरेगा (MGNREGA) से जुड़ी पोस्ट साझा किए जाने से पार्टी के भीतर हलचल तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर यह कदम भले ही सामान्य लगे, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे कांग्रेस नेतृत्व के साथ रिश्तों में नरमी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या शशि थरूर और शीर्ष नेतृत्व के बीच दूरियां अब कम हो रही हैं।

पिछले कुछ समय से कांग्रेस में यह चर्चा आम रही है कि कई नेता पार्टी की आधिकारिक सोच से अलग बयान देते रहे हैं। नवजोत सिंह सिद्धू और उनकी पत्नी को पार्टी से बाहर किए जाने के बाद यह साफ संदेश चला गया कि अब अलग लाइन पर चलने वालों के लिए सख्ती तय है। इस कार्रवाई के बाद कांग्रेस के भीतर हलचल और साफ दिखाई देने लगी है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सिद्धू प्रकरण के बाद कांग्रेस में रहकर अलग सुर में बोलने वाले नेता सतर्क हो गए हैं। जो नेता खुद को पार्टी से बड़ा समझने लगे थे, उन्हें अब यह एहसास हो रहा है कि नेतृत्व अब अनुशासन को हल्के में लेने वाला नहीं है। ऐसे समय में शशि थरूर का राहुल गांधी की पोस्ट को आगे बढ़ाना खास मायने रखता है।

शशि थरूर पहले भी अपने स्वतंत्र और बेबाक बयानों के लिए जाने जाते रहे हैं, जिससे कई बार पार्टी के भीतर हलचल पैदा हुई। लेकिन इस बार उनका रुख बदला हुआ दिखता है। इसे कांग्रेस के भीतर एकजुटता और नेतृत्व के साथ खड़े होने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

कुल मिलाकर, कांग्रेस इस समय अंदरूनी हलचल के दौर से गुजर रही है, लेकिन साथ ही अनुशासन की दिशा में सख्त कदम भी उठा रही है। सिद्धू मामले और हालिया कार्रवाइयों से यह साफ है कि पार्टी अब संदेश दे रही है—कांग्रेस में रहना है तो पार्टी लाइन में रहना होगा, वरना सख्त फैसले तय हैं। शशि थरूर का बदला हुआ रुख इसी बदले हुए माहौल की झलक माना जा रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *