पटना / नई दिल्ली 7 नवंबर 2025
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के गर्म होते माहौल में आज पटना से लेकर पूर्णिया तक एक ही नाम गूंज रहा है — तेजस्वी यादव। महागठबंधन के नेता ने एनडीए पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि अब बिहार की राजनीति “झूठे वादों और प्रचार के नशे” से बाहर निकलेगी। एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए तेजस्वी ने जनता के बीच बिजली की तरह गूंजता ऐलान किया — “बिहार का किसान अब अंधेरे में नहीं रहेगा, सिंचाई के लिए हर खेत तक मुफ्त बिजली पहुंचेगी। यह वादा नहीं, संकल्प है।” यह घोषणा न सिर्फ बिहार की चुनावी सियासत में नई ऊर्जा भर गई, बल्कि एनडीए के वर्षों पुराने विकास के दावों को भी चुनौती दे गई।
तेजस्वी यादव का भाषण भावनाओं, गुस्से और उम्मीदों से भरा हुआ था। उन्होंने कहा कि पिछले 20 सालों से नीतीश कुमार ने बिहार के किसानों को सिर्फ भाषण और बिजली के बिल दिए हैं, लेकिन अब महागठबंधन उन्हें “वास्तविक राहत” देगा। तेजस्वी बोले — “जब देश के कई राज्य किसानों को मुफ्त बिजली दे सकते हैं, तो बिहार क्यों नहीं? हमारे किसान खेत में खून-पसीना बहाते हैं, और सरकार उनसे मीटर के हिसाब से वसूली करती है। यह अन्याय अब नहीं चलेगा!”
जनसभा में तेजस्वी ने मोदी सरकार और जेडीयू-भाजपा गठबंधन पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि “बिहार को धोखे का मैदान बना दिया गया है। कभी विशेष पैकेज के नाम पर, कभी रोजगार के वादों पर जनता को बेवकूफ बनाया गया। लेकिन अब बिहार का नौजवान जाग गया है। जिस दिन वोट पड़ेगा, उस दिन जनता बताएगी कि सत्ता में रहने का मतलब जनता की सेवा है, न कि सत्ता की दलाली।” तेजस्वी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधा चुनौती देते हुए कहा कि अगर वास्तव में बिहार का विकास हुआ होता, तो आज भी लाखों युवा रोज़गार की तलाश में दूसरे राज्यों की धूल न खा रहे होते।
सभा में जब तेजस्वी ने “बिजली, पानी, रोजगार और सम्मान” के चार वादों का संकल्प दोहराया, तो भीड़ का जोश आसमान छू गया। उन्होंने मंच से कहा — “यह चुनाव दिल्ली और पटना की कुर्सियों का नहीं, बल्कि बिहार के सम्मान का चुनाव है। हम नीतीश कुमार और मोदी जी की झूठ की राजनीति को जनता के वोट से जवाब देंगे।” तेजस्वी ने यह भी दावा किया कि उनकी सरकार बनने पर पहले 100 दिनों में किसानों को सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली दी जाएगी और राज्य में एक “कृषि सुरक्षा कोष” बनाया जाएगा, जिससे हर किसान को न्यूनतम आमदनी सुनिश्चित की जा सके।
महागठबंधन ने इस ऐलान को “मिशन किसान” का नाम दिया है, जो आने वाले चरणों में महागठबंधन का मुख्य चुनावी मुद्दा बनने जा रहा है। तेजस्वी की इस घोषणा ने बिहार के ग्रामीण इलाकों में नई चर्चा छेड़ दी है। गांवों के चौपालों में अब यह सवाल गूंज रहा है कि “क्या तेजस्वी की मुफ्त बिजली योजना नीतीश के ‘सात निश्चय’ को निगल जाएगी?” किसानों के लिए मुफ्त सिंचाई बिजली का वादा महज चुनावी जुमला है या यह बिहार की दिशा बदलने वाली नीति बनेगी — इस पर बहस शुरू हो चुकी है।
उधर एनडीए खेमे में भी तेजस्वी की घोषणा से हलचल मच गई है। जेडीयू प्रवक्ता ने पलटवार करते हुए कहा कि “तेजस्वी यादव सिर्फ वादों की राजनीति करते हैं, जबकि नीतीश कुमार ने 18 सालों में बिहार को अंधकार से उजाले में लाया।” बीजेपी नेताओं ने इसे “चुनावी स्टंट” करार देते हुए कहा कि आरजेडी का इतिहास वादों का रहा है, लेकिन अमल का नहीं। लेकिन इस बार माहौल कुछ अलग दिख रहा है — क्योंकि तेजस्वी की सभाओं में युवाओं और किसानों की भारी मौजूदगी एनडीए के माथे पर शिकन डाल रही है।
तेजस्वी यादव ने अपने भाषण के अंत में कहा — “अब बिहार में डर नहीं, अधिकार की राजनीति चलेगी। जो किसान दिन-रात खेत में मेहनत करता है, उसे मीटर की लाठी नहीं, सम्मान की रोशनी चाहिए। हम वो रोशनी लेकर आएंगे।” यह बयान किसी वादे से अधिक, एक युद्धघोष जैसा था — जो न केवल सत्ता के गलियारों में हलचल मचा रहा है, बल्कि बिहार की जनता के दिलों में उम्मीद जगा रहा है।
बिहार चुनाव के इस दौर में तेजस्वी यादव का यह ‘मुफ्त बिजली ऐलान’ राजनीतिक समीकरणों को बदलने वाला साबित हो सकता है। यह सिर्फ एक घोषणा नहीं, बल्कि एनडीए के विकास मॉडल को खुली चुनौती है। अब यह देखना बाकी है कि मोदी-नीतीश की जोड़ी इसका जवाब योजनाओं से देती है या फिर प्रचार की ताकत से। लेकिन एक बात तय है — बिहार की चुनावी रणभूमि अब और गर्म होने वाली है, और इस बार मुकाबला सिर्फ कुर्सी का नहीं, “किसानों की किस्मत” का है।




