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बेल्जियम के 5,000 शिक्षाविदों का विद्रोह: इज़राइल से सभी शैक्षणिक संबंध तोड़ने की मांग

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | ब्रुसेल्स | 3 जून 2026

बेल्जियम के विश्वविद्यालयों में इज़राइल को लेकर बड़ा शैक्षणिक आंदोलन खड़ा हो गया है। देशभर के लगभग 5,000 प्रोफेसरों, शोधकर्ताओं, छात्रों और मानद उपाधि प्राप्त हस्तियों ने विश्वविद्यालयों से इज़राइली संस्थानों के साथ सभी प्रकार के शैक्षणिक और संस्थागत संबंध समाप्त करने की मांग की है।

“नो ऑनर इन कॉम्प्लिसिटी” (No Honour in Complicity) शीर्षक से जारी एक खुले पत्र पर 4,700 से अधिक लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं, जिनमें 1,100 प्रोफेसर और 50 मानद डॉक्टरेट प्राप्त हस्तियां शामिल हैं। हस्ताक्षरकर्ताओं का कहना है कि गाजा और पश्चिमी तट में जारी घटनाओं के मद्देनजर इज़राइली संस्थानों के साथ सहयोग जारी रखना नैतिक और कानूनी रूप से उचित नहीं है।

पत्र में चार प्रमुख मांगें रखी गई हैं। इनमें इज़राइल के उन संस्थानों और कंपनियों के साथ मौजूदा सहयोग समाप्त करना, नए समझौतों पर रोक लगाना, बेल्जियम और यूरोपीय सरकारों पर अंतरराष्ट्रीय कानून लागू करने का दबाव बनाना तथा फिलिस्तीनी उच्च शिक्षा संस्थानों को छात्रवृत्ति और शोध कार्यक्रमों के माध्यम से सहयोग देना शामिल है।

इस अभियान को कई अंतरराष्ट्रीय हस्तियों का समर्थन मिला है। हस्ताक्षरकर्ताओं में संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत फ्रांसेस्का अल्बानीज़, एमनेस्टी इंटरनेशनल की महासचिव एग्नेस कैलामार्ड, पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग, नोबेल पुरस्कार विजेता लेखक जे.एम. कोएट्ज़ी और लेखक-अभिनेता स्टीफन फ्राई जैसे नाम शामिल हैं।

घेंट विश्वविद्यालय की मध्य-पूर्व विशेषज्ञ ब्रिगिट हेरेमांस ने कहा कि फिलिस्तीनी विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है तथा अनेक शिक्षाविदों और बुद्धिजीवियों की जान गई है। उनके अनुसार यूरोपीय शैक्षणिक संस्थानों को अब यह स्वीकार करना होगा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघनों के परिणाम होते हैं।

यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब दुनिया भर के विश्वविद्यालय परिसरों में गाजा युद्ध को लेकर बहस और विरोध प्रदर्शन तेज हैं। आंदोलनकारी समूहों का कहना है कि शैक्षणिक संस्थानों को केवल शिक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय कानून के मुद्दों पर भी स्पष्ट नैतिक रुख अपनाना चाहिए।

इसी बीच बेल्जियम स्थित हिंद रजब फाउंडेशन (HRF) ने भारत सरकार से हिमाचल प्रदेश में छुट्टियां मना रहे एक इज़राइली रिजर्व सैनिक, एतान गिलबोआ, की गिरफ्तारी की मांग की है। संगठन का आरोप है कि गिलबोआ ने गाजा में सैन्य अभियानों के दौरान नागरिक क्षेत्रों को नष्ट करने में भूमिका निभाई और उसके वीडियो तथा सोशल मीडिया पोस्ट इसके प्रमाण हैं। फाउंडेशन ने भारत के संबंधित अधिकारियों को शिकायत भेजकर कार्रवाई की मांग की है।

हालांकि इन आरोपों पर इज़राइली पक्ष की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामला अब अंतरराष्ट्रीय कानूनी और राजनीतिक बहस का विषय बनता जा रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि बेल्जियम में शुरू हुआ यह शैक्षणिक अभियान यूरोप के अन्य देशों के विश्वविद्यालयों पर भी प्रभाव डाल सकता है और इज़राइल-फिलिस्तीन संघर्ष को लेकर वैश्विक अकादमिक जगत में नई बहस को जन्म दे सकता है।

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