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21 लाख दिव्यांग बच्चे, सुविधाएं नदारद! स्कूलों की हकीकत पर राज्यसभा में रंजीता रंजन का सवाल

राज्यसभा में दिव्यांग बच्चों की शिक्षा और स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं को लेकर एक गंभीर मुद्दा उठाया गया है। सांसद रंजीत रंजन ने सरकार से सीधे सवाल करते हुए कहा कि कागज़ों में भले ही नामांकन बढ़ रहा हो, लेकिन ज़मीनी हकीकत अब भी चिंताजनक बनी हुई है।

उन्होंने UDISE (यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन) के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि देशभर में 21 लाख से ज्यादा दिव्यांग बच्चों का स्कूलों में नामांकन दर्ज है, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में स्कूल ऐसे हैं जहां रैंप और दिव्यांग-अनुकूल शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। इसका सीधा असर इन बच्चों की रोज़मर्रा की पढ़ाई और स्कूल आने-जाने पर पड़ता है।

रंजीत रंजन ने सरकार से पूछा कि क्या केंद्र सरकार ने अब तक ऐसे स्कूलों की सही संख्या का आकलन किया है, जहां बाधा-रहित (Barrier-Free) अवसंरचना नहीं है। उन्होंने खास तौर पर ग्रामीण इलाकों और आकांक्षी जिलों का ज़िक्र करते हुए कहा कि वहां स्थिति और भी खराब है। उन्होंने जानना चाहा कि क्या सरकार ने इन क्षेत्रों में 100 प्रतिशत सुलभता सुनिश्चित करने के लिए कोई स्पष्ट समय-सीमा तय की है, या यह मामला अब भी फाइलों में ही अटका हुआ है।

इसके साथ ही उन्होंने शिक्षकों की भारी कमी की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने बताया कि समावेशी शिक्षा के लिए अब तक 30 हजार से भी कम शिक्षकों की बहाली हो पाई है, जो ज़रूरत के मुकाबले बेहद कम है। ऐसे में दिव्यांग बच्चों को सही सहयोग और मार्गदर्शन मिल पाना मुश्किल हो जाता है।

सांसद ने सरकार से यह भी पूछा कि क्या इस कमी को दूर करने के लिए सभी नियमित शिक्षकों को समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) का प्रशिक्षण अनिवार्य करने पर कोई विचार किया जा रहा है। उनका कहना था कि जब तक हर शिक्षक दिव्यांग बच्चों की ज़रूरतों को समझने और उन्हें पढ़ाने के लिए प्रशिक्षित नहीं होगा, तब तक “सबके लिए शिक्षा” का लक्ष्य अधूरा ही रहेगा।

रंजीत रंजन ने साफ शब्दों में कहा कि नामांकन के आंकड़ों से ज्यादा ज़रूरी ज़मीनी सुविधाएं और प्रशिक्षित शिक्षक हैं। अगर स्कूलों में रैंप, शौचालय और संवेदनशील शिक्षक नहीं होंगे, तो दिव्यांग बच्चों के लिए शिक्षा सिर्फ एक औपचारिकता बनकर रह जाएगी। उन्होंने सरकार से अपील की कि इस मुद्दे को प्राथमिकता दी जाए और जल्द ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि हर दिव्यांग बच्चा बिना किसी बाधा के शिक्षा का अधिकार हासिल कर सके।

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