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अमेरिका में ₹22 लाख का अस्पताल बिल, भारत में ₹47 हजार: भारतीय युवक ने सुनाया हेल्थकेयर का अनुभव

वायरल/ ह्यूमन इंटरेस्ट/ स्वास्थ्य | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 31 अगस्त 2026

अमेरिका में काम कर रहे भारतीय मूल के एक युवक ने भारत और अमेरिका की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर अपना व्यक्तिगत अनुभव सोशल मीडिया पर साझा किया है। Yuvaan Ibañez Garware ने इंस्टाग्राम पर वीडियो पोस्ट कर भारत और अमेरिका में सामने आई दो अलग-अलग मेडिकल इमरजेंसी की तुलना की और बताया कि अमेरिका में इलाज का खर्च और बीमा के बावजूद होने वाला आउट-ऑफ-पॉकेट भुगतान उनके लिए बड़ी चिंता का कारण बना।

युवान ने कहा कि अमेरिका में काम करने के बावजूद वह भारत वापस लौटने के बारे में सोच रहे हैं और इसकी प्रमुख वजहों में से एक हेल्थकेयर सिस्टम की लागत और उनका व्यक्तिगत अनुभव है। हालांकि, यह किसी आधिकारिक अध्ययन या दोनों देशों की पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था की तुलना नहीं, बल्कि एक व्यक्ति का अनुभव और उसकी राय है।

भारत में करीब ₹47 हजार का आया बिल

युवान ने बताया कि कुछ वर्ष पहले भारत में उन्हें कई बार बेहोशी की समस्या हुई थी। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उनके मुताबिक बिना ज्यादा कागजी कार्रवाई के तुरंत एक निजी कमरा उपलब्ध कराया गया।

उन्होंने दावा किया कि डॉक्टरों ने कई तरह की जांच कराईं, जिनमें ECG, MRI, CT scan और blood tests शामिल थे। उनके अनुसार, वह जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से बात कर सकते थे और कुछ दिनों बाद उन्हें बीमारी का कारण तथा इलाज की योजना भी बताई गई।

युवान के मुताबिक, इस पूरे इलाज का बिल लगभग $500, यानी उस समय के हिसाब से करीब ₹47,000, आया।

अमेरिका में सीने में तेज दर्द के बाद अस्पताल पहुंचे

इसके बाद उन्होंने अमेरिका में हुए एक मेडिकल इमरजेंसी का अनुभव बताया। उनके अनुसार, बास्केटबॉल खेलते समय उन्हें अचानक सीने में तेज दर्द हुआ।

युवान ने कहा कि उन्हें एंबुलेंस बुलाने में हजारों डॉलर के खर्च का डर था, इसलिए वह कथित तौर पर खुद गाड़ी चलाकर अस्पताल पहुंचे। उन्होंने बताया कि अस्पताल पहुंचने के बाद उन्हें करीब डेढ़ घंटे से ज्यादा समय तक वेटिंग रूम में रहना पड़ा, क्योंकि उनके फॉर्म और दस्तावेजों की प्रक्रिया चल रही थी।

अस्पताल में डॉक्टरों ने कथित तौर पर उन्हें बताया कि उन्हें “मिनी हार्ट अटैक” हुआ था और इसके बाद कई जांच की गईं।

डॉक्टर से मिलने में परेशानी का दावा

युवान ने अपने वीडियो में दावा किया कि अस्पताल में रहते हुए उन्हें डॉक्टर से मिलने में कठिनाई हुई। उनके अनुसार, जब भी उन्होंने डॉक्टर से मिलने के लिए कहा, उन्हें बताया गया कि डॉक्टर व्यस्त हैं और बाद में आएंगे।

उन्होंने खून का सैंपल लेने के दौरान भी कथित तौर पर खराब अनुभव का जिक्र किया। युवान का आरोप है कि नर्स ने उनकी नस खोजने के लिए कई बार कोशिश की और दर्द के कारण चिल्लाने पर उन्हें “shut up” कहा।

इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि रिपोर्ट में नहीं दी गई है।

अमेरिका का बिल देखकर रह गए हैरान

युवान के मुताबिक, इलाज के बाद उन्हें अस्पताल की ओर से करीब $23,000 यानी लगभग ₹22 लाख का बिल मिला।

उन्होंने बताया कि उनके पास अच्छी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी थी और इसके लिए वह हर महीने हजारों डॉलर खर्च कर रहे थे। इसके बावजूद उनके अनुसार उन्हें करीब $7,000 यानी लगभग ₹6.67 लाख अपनी जेब से देने पड़े।

इसी अनुभव के आधार पर उन्होंने अमेरिकी हेल्थकेयर सिस्टम पर तीखी टिप्पणी की और कहा कि अमेरिका में बीमार पड़ना आर्थिक रूप से बेहद भारी पड़ सकता है।

‘मैं भारत का हूं और पुणे में पला-बढ़ा हूं’

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद युवान ने कमेंट सेक्शन में यह भी स्पष्ट किया कि वह भारतीय हैं और पुणे में 16 साल तक पले-बढ़े हैं।

उन्होंने लिखा कि वह फिलहाल अमेरिका में काम कर रहे हैं। यानी उनका मामला स्थायी रूप से अमेरिका में बस चुके किसी व्यक्ति की बजाय वहां काम कर रहे भारतीय पेशेवर के अनुभव के तौर पर सामने आया है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

युवान के वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर भारत और अमेरिका की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर बहस शुरू हो गई। कई लोगों ने अमेरिका में अपने ER यानी Emergency Room के अनुभव साझा किए और भारी मेडिकल बिलों की शिकायत की।

कुछ भारतीय यूजर्स ने भारत में अपेक्षाकृत कम लागत पर इलाज और डॉक्टरों तक आसान पहुंच को बेहतर बताया। वहीं, यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि भारत और अमेरिका में अस्पतालों, बीमा, उपचार की गुणवत्ता, आपातकालीन सेवाओं और मरीजों की आर्थिक स्थिति में काफी विविधता है। इसलिए एक व्यक्ति के अनुभव के आधार पर किसी पूरे देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर या खराब घोषित करना उचित नहीं होगा।

युवान की कहानी हालांकि एक महत्वपूर्ण सवाल जरूर उठाती है—महंगा इलाज केवल इलाज की गुणवत्ता का सवाल नहीं, बल्कि मरीज की आर्थिक सुरक्षा और हेल्थ इंश्योरेंस की वास्तविक उपयोगिता का भी सवाल है।

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