राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 31 अगस्त 2026
भारत में कम मूल्यवर्ग के पॉलिमर बैंकनोट यानी प्लास्टिक नोट लाने की दिशा में प्रक्रिया अब एक महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी Bharatiya Reserve Bank Note Mudran Pvt. Ltd. (BRBNMPL) ने भारतीय बैंकनोटों की छपाई के लिए सुरक्षा सुविधाओं से युक्त Opacified Polymer Substrate Sheets के निर्माण और आपूर्ति के लिए वैश्विक Expression of Interest (EOI) जारी किया है। BRBNMPL के आधिकारिक टेंडर रिकॉर्ड के अनुसार इस EOI का नंबर EOI/04/CO/2026-27 है, इसे 17 जुलाई 2026 को खोला गया था और बोली जमा करने की अंतिम तारीख 18 अगस्त 2026 थी। टेंडर में Integrity Pact भी अनिवार्य रखा गया है। यानी मामला केवल सामान्य प्लास्टिक सामग्री की खरीद का नहीं, बल्कि भविष्य में भारतीय मुद्रा के लिए इस्तेमाल होने वाले अत्यधिक संवेदनशील बैंकनोट सब्सट्रेट की संभावित आपूर्ति से जुड़ा है।
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस वैश्विक प्रक्रिया में कम-से-कम दो विदेशी पॉलिमर करेंसी निर्माता और एक भारतीय सब्सट्रेट निर्माता ने बोली लगाई है। खास बात यह है कि भारतीय कंपनी ने ब्रिटेन की बैंकनोट निर्माण क्षेत्र की प्रमुख कंपनी De La Rue के साथ साझेदारी की है। इससे यह संकेत मिलता है कि भारत इस तकनीक को केवल आयात करने के बजाय अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञता और घरेलू क्षमता के संयोजन के जरिए आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि भारत में निश्चित रूप से किस मूल्यवर्ग का पॉलिमर नोट कब जारी होगा। मौजूदा EOI एक आपूर्तिकर्ता चयन प्रक्रिया है; इसके बाद तकनीकी मूल्यांकन, पात्रता, सुरक्षा जांच, व्यावसायिक मूल्यांकन और अंतिम खरीद जैसे चरण होंगे। इसलिए इसे तत्काल बाजार में नए नोट आने की घोषणा के बजाय उस दिशा में बढ़ता एक महत्वपूर्ण संस्थागत कदम समझना चाहिए।
इस पूरी प्रक्रिया का सबसे दिलचस्प पहलू इसकी राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी शर्तें हैं। रिपोर्ट के अनुसार संभावित आपूर्तिकर्ताओं से Integrity Pact के अलावा Confidentiality Contract और No-Agent Pact भी भरवाया गया है। इसके साथ कंपनियों को यह सुनिश्चित करने का undertaking देना होगा कि भारत में उनके संचालन को चीन और पाकिस्तान में उनके संभावित संचालन से ‘firewall’ किया जाए। बैंकनोट निर्माण में इस्तेमाल होने वाला सब्सट्रेट, सुरक्षा फीचर्स, उत्पादन तकनीक और उससे संबंधित प्रक्रियाएं सामान्य औद्योगिक उत्पादों की तरह नहीं होतीं। मुद्रा देश की आर्थिक व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से सीधे जुड़ी होती है, इसलिए किसी विदेशी आपूर्तिकर्ता के दूसरे देशों में मौजूद कारोबार और भारतीय मुद्रा आपूर्ति के बीच स्पष्ट संस्थागत और परिचालन अलगाव रखना संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
एक और महत्वपूर्ण शर्त animal tallow यानी पशु चर्बी से संबंधित है। बोली प्रक्रिया में कंपनियों से यह प्रमाणित करने को कहा गया है कि प्रस्तावित सामग्री में animal tallow का इस्तेमाल नहीं किया गया है। यह शर्त इसलिए भी ध्यान आकर्षित करती है क्योंकि मुद्रा निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की संरचना को लेकर धार्मिक, सामाजिक और सार्वजनिक संवेदनशीलता रहती है। इसका अर्थ यह नहीं है कि मौजूदा भारतीय कागजी नोटों में पशु चर्बी होने की कोई नई पुष्टि हुई है; बल्कि इस विशेष भविष्य की पॉलिमर सब्सट्रेट खरीद प्रक्रिया में आपूर्तिकर्ताओं से सामग्री के बारे में स्पष्ट प्रमाण मांगा गया है। इस तरह सरकार और मुद्रा निर्माण से जुड़ी संस्था संभावित विवाद की गुंजाइश को पहले ही समाप्त करने की कोशिश करती दिखाई देती है।
पॉलिमर बैंकनोटों की दिशा में भारत की रुचि को केवल ‘कागज की जगह प्लास्टिक’ के रूप में देखना भी अधूरा होगा। बैंकनोट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा उसकी सुरक्षा, टिकाऊपन और नकली नोटों के खिलाफ प्रतिरोध है। पॉलिमर सब्सट्रेट में विशेष सुरक्षा फीचर्स को एकीकृत किया जा सकता है और नोट की पूरी संरचना इस तरह तैयार की जा सकती है कि उसके वास्तविक होने की पहचान मशीनों तथा आम लोगों दोनों के लिए आसान हो। कम मूल्यवर्ग के नोट विशेष रूप से तेजी से हाथ बदलते हैं, इसलिए उनके जल्दी गंदे या क्षतिग्रस्त होने की समस्या मुद्रा प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण होती है। पॉलिमर नोटों की संभावित उपयोगिता का एक पहलू यह भी है कि उनकी संरचना कागजी नोटों की तुलना में अलग तरह की होती है और वे लंबे समय तक चलने के लिए डिजाइन किए जा सकते हैं। हालांकि वास्तविक लाभ भारत में इस्तेमाल होने वाली तकनीक, लागत, सुरक्षा फीचर्स और उत्पादन गुणवत्ता पर निर्भर करेगा।
इस परियोजना को BRBNMPL की व्यापक Make in India और backward integration रणनीति के संदर्भ में भी देखना जरूरी है। BRBNMPL RBI की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी है और उसके पास बैंकनोट उत्पादन के लिए मैसूरु, कर्नाटक और सालबोनी, पश्चिम बंगाल में दो प्रिंटिंग प्रेस हैं। मैसूरु में उसकी अपनी Varnika ink manufacturing facility भी है, जहां बैंकनोटों की छपाई के लिए इस्तेमाल होने वाली स्याही और वार्निश से संबंधित उत्पादन क्षमता विकसित की गई है। 2026 में BRBNMPL ने colour-shift pigment और colour-shift film के लिए भी तकनीक तथा उत्पादन क्षमता विकसित करने की दिशा में EOI जारी किया था। उसके दस्तावेज में Phase-1 में colour-shift pigment के लिए सालाना 10 टन की उत्पादन क्षमता और आगे 50% तक विस्तार की योजना का उल्लेख है, जबकि Phase-2 में PVD technology के जरिए colour-shift film के घरेलू उत्पादन की बात कही गई है। इससे व्यापक तस्वीर यह बनती है कि भारत बैंकनोटों में इस्तेमाल होने वाले महत्वपूर्ण सुरक्षा-सामानों और तकनीकों की घरेलू क्षमता बढ़ाने की दिशा में भी काम कर रहा है।
पॉलिमर नोट आने की स्थिति में इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं होगा कि भारत के सभी मौजूदा कागजी नोट अचानक बंद हो जाएंगे। आम तौर पर मुद्रा प्रणाली में किसी नई सामग्री या डिजाइन को चरणबद्ध तरीके से शामिल किया जाता है। इसलिए यदि पॉलिमर बैंकनोट परियोजना आगे बढ़ती है तो शुरुआत किसी विशेष कम मूल्यवर्ग या सीमित उपयोग वाले नोट से हो सकती है और उसके प्रदर्शन, लागत, सुरक्षा तथा जनता के अनुभव का मूल्यांकन किया जा सकता है। अभी BRBNMPL के सार्वजनिक टेंडर में किसी विशेष मूल्यवर्ग के नोट को लेकर अंतिम घोषणा दिखाई नहीं देती। इसलिए फिलहाल सबसे सटीक निष्कर्ष यही है कि भारत ने पॉलिमर बैंकनोटों के लिए जरूरी सब्सट्रेट की संभावित आपूर्ति का औपचारिक वैश्विक बाजार खोल दिया है, लेकिन नए प्लास्टिक नोटों के प्रचलन की अंतिम तारीख अभी घोषित नहीं हुई है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया में तकनीक, सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय हित चारों एक साथ दिखाई दे रहे हैं। एक ओर भारत अंतरराष्ट्रीय बैंकनोट तकनीक रखने वाली कंपनियों से विशेषज्ञता लेने के लिए तैयार है, वहीं दूसरी ओर चीन और पाकिस्तान से परिचालन अलग रखने, एजेंटों पर नियंत्रण, गोपनीयता समझौते और Integrity Pact जैसी शर्तों के जरिए आपूर्ति श्रृंखला को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है। यदि यह प्रक्रिया सफलतापूर्वक आगे बढ़ती है, तो भारत की मुद्रा व्यवस्था में पॉलिमर नोट केवल नए प्रकार के नोट नहीं होंगे, बल्कि वे उन्नत सुरक्षा तकनीक, अधिक टिकाऊ मुद्रा और रणनीतिक रूप से सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला की दिशा में एक बड़ा प्रयोग साबित हो सकते हैं।




