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₹1.31 लाख करोड़ की मदद से UAE बना दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा मददगार देश

अंतरराष्ट्रीय डेस्क | 22 नवंबर 2025

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने साल 2025 में दुनिया को मानवीय सहायता देने के मामले में एक नया बड़ा रिकॉर्ड बना दिया है। संयुक्त राष्ट्र की संस्था UNOCHA द्वारा जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि UAE ने इस वर्ष $1.46 बिलियन की सहायता दी। जब इस राशि को भारतीय मुद्रा में बदला जाता है तो यह करीब ₹1,31,000 करोड़ से अधिक (लगभग ₹1.31 लाख करोड़ / ₹1.31 खरब रुपये) बनती है। इतनी बड़ी राशि दुनिया भर में चल रही मानवीय सहायता का 7.2% हिस्सा है, यानी विश्व में जो भी सहायता फंड दिया गया, उसमें से एक बड़ा हिस्सा अकेले UAE ने दिया। इस उपलब्धि ने UAE को दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा मानवीय दानदाता देश बना दिया है। उससे आगे सिर्फ संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय संघ हैं, जबकि ब्रिटेन, जर्मनी, कनाडा और जापान जैसे शक्तिशाली देशों को UAE ने सहायता के मामले में पीछे छोड़ दिया।

दुनिया भर में इस वर्ष संघर्ष, युद्ध, सूखा, बाढ़, भूकंप, जलवायु परिवर्तन और आर्थिक संकट ने करोड़ों लोगों को प्रभावित किया। इसी वजह से संयुक्त राष्ट्र के पास कुल $20.28 बिलियन, यानी लगभग ₹18 लाख करोड़ की मदद पहुंची। इन परिस्थितियों में UAE की तेज प्रतिक्रिया, बड़ी सहायता राशि और जरूरतमंदों तक तुरंत मदद पहुंचाने की क्षमता की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खूब सराहना हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि UAE अब सिर्फ एक अमीर देश नहीं, बल्कि दुनिया में मानवता की मदद करने वाला भरोसेमंद राष्ट्र बनकर उभर रहा है।

UAE की इस सफलता के पीछे देश के नेतृत्व की सोच और मानवीय मूल्य महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और अंतरराष्ट्रीय मानवतावादी परिषद के अध्यक्ष शेख थैयाब बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने कहा कि यह उपलब्धि UAE की उस परंपरा का हिस्सा है जो इसके संस्थापक नेता शेख जायेद ने शुरू की थी। UAE मानता है कि संकट के समय दुनिया की मदद करना सिर्फ एक नीति नहीं, बल्कि उसकी नैतिक और राष्ट्रीय जिम्मेदारी है। इसी वजह से UAE की सहायता सिर्फ आपातकालीन राहत तक सीमित नहीं रहती।

UAE की मानवीय रणनीति की खासियत यह है कि वह दो स्तरों पर काम करती है—तत्काल राहत और लंबे समय की पुनर्निर्माण प्रक्रिया। इस सहायता में भोजन, पानी, कपड़े, दवाइयाँ, अस्थायी आश्रय जैसी तत्काल जरूरतें शामिल होती हैं। इसके साथ ही UAE युद्ध और आपदाओं से प्रभावित देशों में अस्पतालों का पुनर्निर्माण, स्कूल और शिक्षा व्यवस्था की स्थापना, स्वच्छ पानी और ऊर्जा परियोजनाओं का विकास, तथा टूटे हुए घरों और ढाँचों का पुनर्निर्माण भी करवाता है। इस मॉडल की दुनिया भर में तारीफ की जा रही है क्योंकि यह सिर्फ दुख कम नहीं करता, बल्कि समुदायों को फिर से खड़ा होने का मौका देता है।

UAE की मदद का एक और बड़ा पहलू यह है कि वह किसी भी व्यक्ति की सहायता धर्म, जाति, नस्ल, रंग या देश देखकर नहीं करता। UAE का मानना है कि मानवता सबसे पहले आती है, और जरूरतमंद किसी भी देश या समाज में हों, उनकी सहायता की जानी चाहिए। इसी वजह से UAE की अंतरराष्ट्रीय छवि एक “मदद करने वाले और भरोसेमंद देश” के रूप में तेजी से बढ़ रही है। उसकी यह नीति उसकी सॉफ्ट पावर और कूटनीतिक संबंधों को भी मजबूत कर रही है।

विश्लेषकों का कहना है कि UAE का यह योगदान सिर्फ आर्थिक शक्ति दिखाने का तरीका नहीं, बल्कि उसकी बढ़ती वैश्विक भूमिका का संकेत है। मध्य-पूर्व, अफ्रीका और एशिया में जहां-जहां मानवीय संकट बढ़ रहे हैं, UAE की मौजूदगी और सहायता लगातार बढ़ रही है। इससे UAE अब एक आर्थिक ताकत के साथ-साथ वैश्विक मानवीय नेतृत्व वाला देश भी बन रहा है। आने वाले समय में यह मॉडल अन्य देशों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है कि असली नेतृत्व वही है जो मुश्किल समय में मानवता के साथ खड़ा रहे।

इस तरह UAE द्वारा दिया गया ₹1.31 लाख करोड़ का दान सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि दुनिया में मानवता, सहयोग और साझा भविष्य की दिशा में उसकी बड़ी भूमिका का प्रमाण है। यह योगदान आने वाले वर्षों में वैश्विक मानवीय प्रयासों को नई दिशा दे सकता है।

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