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‘नमाज रोकेंगे नहीं, लेकिन सड़क पर भी नहीं होने देंगे’, जरूरी है तो शिफ्ट में पढ़िए : योगी आदित्यनाथ

राजनीति / उत्तर प्रदेश | अनील यादव | ABC NATIONAL NEWS | लखनऊ | 18 मई 2026

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सार्वजनिक स्थानों पर नमाज को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि सरकार किसी को नमाज पढ़ने से नहीं रोकेगी, लेकिन सड़कों पर नमाज की अनुमति भी नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि किसी स्थान पर भीड़ अधिक होती है तो लोग “शिफ्ट में नमाज पढ़ें”, लेकिन सार्वजनिक रास्तों को बाधित करना स्वीकार नहीं किया जा सकता। योगी का यह बयान सामने आते ही राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई बहस शुरू हो गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़कें और सार्वजनिक मार्ग आम जनता की आवाजाही के लिए होते हैं, इसलिए किसी भी धार्मिक गतिविधि के कारण यातायात या कानून व्यवस्था प्रभावित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार “कानून सबके लिए समान” की नीति पर काम कर रही है और किसी भी धर्म के लोगों को सार्वजनिक स्थानों पर स्थायी कब्जे की अनुमति नहीं दी जाएगी। योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि प्रशासन का उद्देश्य किसी की धार्मिक स्वतंत्रता छीनना नहीं बल्कि व्यवस्था बनाए रखना है।

योगी के बयान के बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधा है। कुछ नेताओं का आरोप है कि बीजेपी सरकार धार्मिक मुद्दों को राजनीतिक एजेंडे के तौर पर इस्तेमाल करती है और केवल एक समुदाय को केंद्र में रखकर बयानबाजी करती है। विपक्ष का कहना है कि यदि मस्जिदों में पर्याप्त जगह नहीं होती और प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था नहीं करता, तो कई बार लोग मजबूरी में खुले स्थानों का इस्तेमाल करते हैं। वहीं बीजेपी नेताओं ने मुख्यमंत्री के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना सरकार का संवैधानिक दायित्व है।

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बीजेपी का तर्क है कि यह केवल नमाज का मुद्दा नहीं बल्कि सभी धार्मिक आयोजनों पर समान नियम लागू करने की नीति है। पार्टी नेताओं ने कहा कि चाहे धार्मिक जुलूस हों, कांवड़ यात्रा हो या अन्य सार्वजनिक आयोजन — किसी को भी सड़कें बाधित करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। बीजेपी नेताओं के अनुसार योगी सरकार “सार्वजनिक अनुशासन” और “कानून व्यवस्था” को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।

दूसरी ओर कई मुस्लिम संगठनों ने कहा कि नमाज इस्लाम का महत्वपूर्ण हिस्सा है और शुक्रवार या ईद जैसे मौकों पर मस्जिदों में भारी भीड़ के कारण अतिरिक्त जगह की आवश्यकता पड़ती है। हालांकि कुछ संगठनों ने यह भी कहा कि यदि प्रशासन सम्मानजनक वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराए तो समाधान निकाला जा सकता है। कुछ धार्मिक नेताओं ने संवाद और समन्वय की जरूरत पर जोर दिया है ताकि विवाद की स्थिति पैदा न हो।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दे लंबे समय से चुनावी विमर्श का अहम हिस्सा रहे हैं। योगी आदित्यनाथ की राजनीति में “कानून व्यवस्था” और “सख्त प्रशासन” एक प्रमुख पहचान बन चुकी है। ऐसे में उनका यह बयान बीजेपी के मुख्य राजनीतिक नैरेटिव को और मजबूत करने वाला माना जा रहा है। वहीं विपक्ष इसे ध्रुवीकरण की राजनीति के तौर पर देख रहा है।

देश के कई हिस्सों में पहले भी सार्वजनिक स्थानों पर नमाज को लेकर विवाद हो चुके हैं। नोएडा, गुरुग्राम, मेरठ और अन्य शहरों में प्रशासन द्वारा अनुमति प्रणाली लागू की गई थी, जबकि कुछ जगहों पर विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक बयानबाजी भी देखने को मिली थी। अदालतों में भी समय-समय पर इस विषय को लेकर याचिकाएं दायर होती रही हैं, जिनमें सार्वजनिक व्यवस्था और धार्मिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन की बात उठाई गई।

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फिलहाल योगी आदित्यनाथ के इस बयान ने एक बार फिर धार्मिक अधिकारों, प्रशासनिक नियंत्रण और सार्वजनिक व्यवस्था को लेकर राष्ट्रीय बहस को तेज कर दिया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि उत्तर प्रदेश सरकार इस मुद्दे पर आगे क्या नई नीति या दिशा-निर्देश जारी करती है और विपक्ष इस बहस को किस तरह राजनीतिक रूप देता है।

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