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Form-6 में ‘गैरकानूनी’ बदलाव किसने कराया? राहुल गांधी का चुनाव आयोग से सीधा सवाल—TCS को आदेश किसने दिया, मंजूरी किसने दी?

राष्ट्रीय/ राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 1 अक्टूबर 2026

नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले ऑनलाइन Form-6 में SIR से जुड़ा बदलाव अब चुनाव आयोग के लिए बड़ा सवाल बन गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को सीधे पूछा कि चुनाव आयोग में आखिर किसने Tata Consultancy Services (TCS) को Form-6 में यह बदलाव करने का आदेश दिया, TCS में किसने उसे मंजूरी दी और क्या कंपनी पर ऐसा करने के लिए कोई दबाव बनाया गया था? राहुल गांधी ने इस बदलाव को “illegal” बताते हुए इसकी पूरी जिम्मेदारी तय करने की मांग की।

मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि The Indian Express की जांच के मुताबिक चुनाव आयोग के ही दो आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—ने Form-6 में किए गए बदलाव पर आपत्ति दर्ज की थी। दोनों ने रिकॉर्ड पर कहा था कि वैधानिक Form-6 में ऐसा बदलाव संबंधित नियमों में संशोधन के बिना नहीं किया जा सकता। संधू ने कथित तौर पर बदलाव को “unauthorised/illegal” बताते हुए इसे तत्काल हटाने की मांग की थी। इसके बावजूद बदलाव ऑनलाइन पोर्टल पर बना रहा।

Form-6 में जो नया हिस्सा जोड़ा गया था, उसमें नए मतदाता से यह जानकारी मांगी जा रही थी कि उसका नाम या उसके माता-पिता अथवा दादा-दादी का नाम पिछली SIR में तैयार मतदाता सूची में था या नहीं। रिपोर्ट के मुताबिक यह हिस्सा मूल वैधानिक फॉर्म में औपचारिक संशोधन किए बिना ऑनलाइन पोर्टल पर जोड़ा गया था। यही वह बिंदु है जिस पर चुनाव आयोग के भीतर कानूनी अधिकार और प्रक्रिया को लेकर आपत्ति सामने आई।

राहुल गांधी का सवाल इसलिए भी सीधा है—सॉफ्टवेयर अपने आप चुनावी नियम नहीं बदलता। किसी बदलाव के लिए आवश्यकता तय होती है, निर्देश जारी होता है, तकनीकी टीम उसे लागू करती है और अंत में कोई अधिकारी या अधिकृत संस्था उसे मंजूरी देती है। ऐसे में अगर Form-6 में किया गया बदलाव वास्तव में नियमों के अनुरूप नहीं था, तो अब जवाबदेही की पूरी श्रृंखला सामने आनी चाहिए—आदेश किसने दिया? TCS को निर्देश किसने भेजा? किस अधिकारी ने इसे स्वीकृत किया? किसने इसे लाइव कराया? और दो चुनाव आयुक्तों की आपत्ति के बावजूद बदलाव क्यों जारी रहा?

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि Form-6 में यह बदलाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की जोड़ी द्वारा “orchestrated” किया गया। यह कांग्रेस का राजनीतिक आरोप है और इसे स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं पेश किया जा सकता। चुनाव आयोग ने अपने स्तर पर SIR और संबंधित प्रक्रियाओं को लेकर स्पष्टीकरण दिए हैं।

इस पूरे विवाद के बीच चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर एक और सवाल खड़ा हुआ है। अगर आयोग के तीन सदस्यों में से दो किसी तकनीकी या कानूनी बदलाव पर आपत्ति दर्ज करते हैं, तो उस आपत्ति का निपटारा किस तरीके से हुआ? क्या उस बदलाव के लिए सक्षम प्राधिकारी की अनुमति ली गई थी? क्या नियमों में संशोधन किया गया था? और यदि नहीं किया गया था, तो ऑनलाइन पोर्टल पर वैधानिक फॉर्म का बदला हुआ संस्करण कैसे पहुंचा?

मामले का एक अहम घटनाक्रम यह भी है कि चुनाव आयोग ने बाद में अंतिम रूप से तैयार हो चुके राज्यों में Form-6 से SIR संबंधी अतिरिक्त घोषणा को हटाया। इससे विवाद और गहरा गया है, क्योंकि अब सवाल यह भी है कि जिस बदलाव की वैधता पर आयोग के भीतर ही आपत्ति थी, उसे पहले लागू करने और बाद में हटाने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया।

इसी बीच बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने भी SIR से जुड़ी मतदाता सूची की प्रक्रिया पर चुनाव आयोग से तीखे सवाल पूछे हैं। अदालत ने इस बात पर चिंता जताई कि क्या सॉफ्टवेयर की तकनीकी सीमाओं के कारण किसी मतदाता के आवेदन को खारिज किया जा सकता है और क्या कानून में निर्धारित प्रक्रिया को तकनीकी सिस्टम के हवाले किया जा सकता है।

अब मामला सिर्फ Form-6 के एक अतिरिक्त कॉलम का नहीं रह गया है। यह सवाल बन गया है कि भारत में मतदाता बनने की प्रक्रिया आखिर कानून तय करेगा या सॉफ्टवेयर? अगर किसी युवा का वोटर के रूप में पंजीकरण किसी डिजिटल सिस्टम में जोड़े गए अतिरिक्त सवाल पर निर्भर हो जाए, तो उस बदलाव की कानूनी वैधता और प्रशासनिक जिम्मेदारी दोनों स्पष्ट होनी चाहिए।

INDIA गठबंधन ने इसी मुद्दे को व्यापक चुनावी पारदर्शिता के सवाल से जोड़ते हुए आंदोलन तेज करने का फैसला किया है। 30 सितंबर की बैठक के बाद विपक्षी दलों ने 2 अक्टूबर से जिला स्तर पर ‘Save Democracy’ मार्च और 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग के मुख्यालय तक विपक्षी सांसदों के मार्च का ऐलान किया है।

अब असली सवाल यही है—

1. Form-6 किसने बदला?
2. TCS को आदेश किसने दिया?
3. मंजूरी किसने दी?
4. दो चुनाव आयुक्तों की आपत्ति के बावजूद बदलाव क्यों जारी रहा?
5. और अगर बदलाव कानून के मुताबिक नहीं था, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी है?
6. देशद्रोही हरकतों के पीछे कौन कौन हैं?

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