राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | अयोध्या | 27 जून 2026
राम मंदिर के चढ़ावे में सामने आए गबन के मामले ने अब केवल कानून और राजनीति की सीमाएं पार कर दी हैं। इसका असर अयोध्या की धार्मिक, सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। अयोध्या के संत रामदास बाल योगी महाराज का कहना है कि इस पूरे प्रकरण के बाद श्रद्धालुओं का भरोसा कमजोर हुआ है, जिसके कारण केवल राम मंदिर ही नहीं बल्कि अयोध्या के अन्य मंदिरों में भी आने वाले श्रद्धालुओं और दान की मात्रा में कमी आई है। उनका कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम की सजा केवल आरोपियों को नहीं, बल्कि पूरी अयोध्या भुगत रही है। उनके अनुसार, जो श्रद्धालु पहले राम मंदिर दर्शन के बाद सरयू तट और आसपास के अन्य मंदिरों में भी दर्शन-पूजन करते थे, अब उनकी संख्या कम होती दिखाई दे रही है। उनका कहना है कि यदि भगवान के घर में चढ़ावे की सुरक्षा पर ही सवाल उठेंगे तो श्रद्धालुओं का विश्वास डगमगाना स्वाभाविक है।
रामदास बाल योगी महाराज ने कहा कि जिन लोगों ने भगवान राम के नाम पर चढ़ाए गए दान में हाथ डाला है, उन्हें प्रशासन सजा दे या न दे, भगवान राम उन्हें कभी माफ नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि आस्था के साथ छल केवल आर्थिक अपराध नहीं बल्कि धार्मिक और नैतिक अपराध भी है। उनका कहना है कि यदि मंदिर में चोरी होगी तो श्रद्धालु दान देने से पहले कई बार सोचेंगे और इसका सीधा असर उन छोटे-छोटे मंदिरों, आश्रमों और साधु-संतों पर पड़ेगा जिनका जीवन श्रद्धालुओं के सहयोग से चलता है। उनके शब्दों में, “जब चोरी करेंगे तो दान कैसे मिलेगा? पूरी अयोध्या इसकी सजा भुगत रही है।”
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सबसे पहले इस मुद्दे को सार्वजनिक किया था, तब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया था और कहा था कि सब कुछ व्यवस्थित है। लेकिन बाद में उत्तर प्रदेश सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया, प्रारंभिक जांच में अनियमितताएं सामने आईं, एफआईआर दर्ज हुई और उसके बाद आठ आरोपियों की गिरफ्तारी हुई। रामदास बाल योगी का कहना है कि यदि जांच में कुछ नहीं मिला होता तो एफआईआर दर्ज नहीं होती और गिरफ्तारियां भी नहीं होतीं। इसलिए अब केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक कार्रवाई सीमित रखना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि पूरी व्यवस्था की जवाबदेही भी तय करनी होगी।
संत रामदास बाल योगी ने यह सवाल भी उठाया कि जब राम मंदिर के निर्माण का श्रेय सार्वजनिक रूप से लिया गया, तब अब चढ़ावे में हुई गड़बड़ी की जिम्मेदारी कौन लेगा? उनका कहना है कि मंदिर निर्माण के समय ट्रस्ट के पदाधिकारी, बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता लगातार इस ऐतिहासिक उपलब्धि का प्रचार करते रहे। यदि मंदिर बनने का श्रेय शीर्ष नेतृत्व और प्रबंधन को दिया गया, तो अब करोड़ों श्रद्धालुओं के चढ़ावे में सामने आई गड़बड़ियों की जिम्मेदारी केवल कुछ वेतनभोगी कर्मचारियों पर डालकर कैसे समाप्त की जा सकती है? उन्होंने यह भी कहा कि जिन कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई है, उनकी प्रशासनिक और आर्थिक हैसियत इतनी नहीं मानी जा सकती कि वे बिना किसी बड़ी मिलीभगत के लंबे समय तक इस तरह की गतिविधियां संचालित कर सकें। हालांकि इस संबंध में जांच एजेंसियों ने अभी किसी वरिष्ठ पदाधिकारी की भूमिका की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और जांच जारी है।
रामदास बाल योगी ने पहले सामने आए भूमि खरीद विवादों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय भी गंभीर सवाल उठे थे, लेकिन यदि उसी समय जवाबदेही तय की गई होती तो शायद आज स्थिति यहां तक नहीं पहुंचती। उन्होंने दावा किया कि चढ़ावे से जुड़ी गड़बड़ियां केवल नकदी तक सीमित नहीं थीं, बल्कि बहुमूल्य वस्तुओं और अन्य सामग्री को लेकर भी अनेक सवाल उठे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि छोटी मछलियों को पकड़ लिया गया, लेकिन बड़ी मछलियों तक जांच अभी नहीं पहुंची। यह उनका आरोप है, जिसकी स्वतंत्र जांच और न्यायिक प्रक्रिया अभी जारी है।
रामदास बाल योगी का यह भी कहना है कि मंदिर परिसर में अत्याधुनिक सीसीटीवी व्यवस्था, बहुस्तरीय सुरक्षा और कड़ी निगरानी होने के बावजूद यदि लंबे समय तक चढ़ावे में गड़बड़ियां होती रहीं, तो यह केवल कर्मचारियों की नहीं बल्कि पूरी निगरानी प्रणाली की विफलता भी मानी जाएगी। उन्होंने दावा किया कि पहले भी संबंधित अधिकारियों को चढ़ावे की गिनती और अन्य व्यवस्थाओं में अनियमितताओं की जानकारी दी गई थी। उनका कहना है कि यदि समय रहते इन शिकायतों पर गंभीरता से कार्रवाई की जाती तो शायद करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था पर यह आघात नहीं पहुंचता।
आज यह मामला केवल एक आपराधिक जांच नहीं रह गया है। यह करोड़ों श्रद्धालुओं के विश्वास, मंदिर प्रबंधन की पारदर्शिता और धार्मिक संस्थाओं की जवाबदेही से जुड़ा राष्ट्रीय प्रश्न बन चुका है। अयोध्या के संतों की यह चिंता भी इसी ओर संकेत करती है कि यदि श्रद्धालुओं का भरोसा टूटता है तो उसका प्रभाव केवल एक मंदिर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी धार्मिक नगरी और उससे जुड़े हजारों परिवारों तक पहुंचता है। अब देश की निगाहें इस बात पर हैं कि जांच केवल गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित रहती है या फिर पूरे तंत्र की निष्पक्ष और व्यापक पड़ताल कर श्रद्धालुओं के विश्वास को दोबारा मजबूत करने का प्रयास किया जाता है।




