[the_ad id="179"]
Home » International » भीड़तंत्र नहीं, संवाद चाहिए — बांग्लादेश के हालात पर शशि थरूर

भीड़तंत्र नहीं, संवाद चाहिए — बांग्लादेश के हालात पर शशि थरूर

एबीसी डेस्क 20 दिसंबर 2025

बांग्लादेश में जारी राजनीतिक और सामाजिक तनाव पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने चिंता जताते हुए एक संतुलित और मानवीय अपील की है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक समाज में समस्याओं का हल “भीड़तंत्र” से नहीं, बल्कि संवाद, समझ और संवैधानिक प्रक्रिया से निकलता है।

शशि थरूर ने कहा कि बांग्लादेश इस समय एक नाज़ुक दौर से गुजर रहा है। ऐसे हालात में भावनाओं में बहकर हिंसा या दबाव की राजनीति अपनाना हालात को और बिगाड़ सकता है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन जब असहमति सड़क पर उग्र भीड़ का रूप ले लेती है, तो वह लोकतंत्र को कमज़ोर करती है।

थरूर का मानना है कि किसी भी देश की स्थिरता उसके संस्थानों, कानून के राज और आपसी संवाद पर टिकी होती है। उन्होंने चेतावनी दी कि भीड़ के ज़रिये फैसले थोपना न सिर्फ खतरनाक है, बल्कि इसका खामियाज़ा आम नागरिकों को भुगतना पड़ता है—वही लोग जो पहले से ही असुरक्षा और डर में जी रहे होते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत जैसे पड़ोसी देश के लिए बांग्लादेश में शांति और स्थिरता बेहद अहम है। दोनों देशों के रिश्ते सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इतिहास, संस्कृति और लोगों से लोगों के संबंधों से जुड़े हुए हैं। ऐसे में बांग्लादेश में अस्थिरता पूरे क्षेत्र को प्रभावित कर सकती है।

शशि थरूर ने अपील की कि सभी पक्ष संयम बरतें, संवाद का रास्ता अपनाएं और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करें। उनका कहना था कि सड़क की ताकत से नहीं, बातचीत और भरोसे से ही स्थायी समाधान निकलता है।

इस बयान को बांग्लादेश के हालात पर एक परिपक्व, संवेदनशील और जिम्मेदार प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है—जो शोर से नहीं, समझ से रास्ता निकालने की बात करती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *