एबीसी नेशनल न्यूज | बरनाला (पंजाब) | 28 फरवरी 2026
पंजाब के बरनाला में आयोजित ‘मनरेगा बचाओ संग्राम रैली’ शनिवार को उस समय पूरी तरह राजनीतिक संदेश में बदल गई जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मंच से पंजाब कांग्रेस के भीतर चल रही गुटबाज़ी और मुख्यमंत्री पद की दावेदारी को लेकर खुला और सख्त रुख अपनाया। हजारों कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में राहुल गांधी ने साफ शब्दों में कहा कि “कोई अकेला खिलाड़ी मैच नहीं जीत सकता। काम टीमवर्क से होता है। टीम प्लेयर बनिए, टीम पर्सन बनिए।” उनके इस बयान को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सक्रिय दावेदारों के लिए सीधी चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
राहुल गांधी ने बिना किसी का नाम लिए यह भी स्पष्ट कर दिया कि संगठन सर्वोपरि है। उन्होंने कहा, “पार्टी से बड़ा कोई नहीं है, चाहे आप कितने भी वरिष्ठ या बड़े क्यों न हों। अगर आप टीम प्लेयर नहीं बने, तो खड़गे जी और मैं आपको रिजर्व में बैठा देंगे।” मंच से दिया गया उनका यह कथन — “खड़गे जी और मैं आपको फिक्स कर देंगे” — राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। इसे हाईकमान की तरफ से अनुशासन और एकजुटता को लेकर अंतिम चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है। रैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, प्रताप सिंह बाजवा और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे, जिससे यह संकेत और मजबूत हो गया कि संदेश सामूहिक रूप से दिया गया है।
पंजाब कांग्रेस पिछले कुछ समय से अंदरूनी खींचतान और नेतृत्व को लेकर अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है। प्रदेश में कई नेता मुख्यमंत्री पद के संभावित चेहरे के रूप में खुद को स्थापित करने की कोशिश में लगे हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि जैसे-जैसे 2027 के चुनाव नजदीक आएंगे, दावेदारी और गुटबाजी और तेज हो सकती है। ऐसे में राहुल गांधी का यह सार्वजनिक बयान संगठन को समय रहते अनुशासन में रखने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी की असली ताकत उसके कार्यकर्ता हैं और वही तय करेंगे कि “कप्तान” कौन होगा, जिससे यह संकेत मिला कि अंतिम फैसला कार्यकर्ताओं की भावना और हाईकमान की सहमति से होगा।
रैली का घोषित एजेंडा मनरेगा को लेकर था, लेकिन राहुल गांधी के भाषण का बड़ा हिस्सा संगठनात्मक एकता और नेतृत्व पर केंद्रित रहा। उन्होंने केंद्र सरकार पर मनरेगा को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए जीवनरेखा है और इसे कमजोर करना गरीबों के खिलाफ कदम है। इसके अलावा उन्होंने भारत-अमेरिका संभावित व्यापार समझौते को लेकर किसानों के हितों पर चिंता जताई और कहा कि पंजाब जैसे कृषि प्रधान राज्य में किसानों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर भी उन्होंने तीखी टिप्पणी की और कहा कि कांग्रेस किसानों, मजदूरों और युवाओं की आवाज उठाती रहेगी।
हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इस पूरे भाषण का सबसे अहम हिस्सा संगठनात्मक अनुशासन पर दिया गया स्पष्ट संदेश था। राहुल गांधी का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। पंजाब की राजनीति में इसे कांग्रेस के भीतर शक्ति संतुलन साधने और हाईकमान की पकड़ मजबूत रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। बरनाला की इस रैली ने साफ संकेत दे दिया है कि पंजाब में अगला मुख्यमंत्री चेहरा तय करने की प्रक्रिया अभी खुली है, लेकिन अंतिम निर्णय किसी एक नेता की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा पर नहीं छोड़ा जाएगा। राहुल गांधी ने मंच से यह स्पष्ट कर दिया कि संगठन पहले है, व्यक्ति बाद में। 2027 के चुनाव से पहले दिया गया यह संदेश आने वाले महीनों में पंजाब कांग्रेस की आंतरिक राजनीति की दिशा तय कर सकता है।




