Home » International » ईरान में महंगाई बेलगाम, युद्ध और प्रतिबंधों से बिगड़ी अर्थव्यवस्था; नौकरियां गायब, आम आदमी बेहाल

ईरान में महंगाई बेलगाम, युद्ध और प्रतिबंधों से बिगड़ी अर्थव्यवस्था; नौकरियां गायब, आम आदमी बेहाल

Facebook
WhatsApp
X
Telegram

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | तेहरान | 3 मई 2026

तेहरान। अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे तनाव का असर अब ईरान की आम जनता पर साफ दिखने लगा है। देश में महंगाई तेजी से बढ़ रही है और लाखों लोगों की नौकरियां या तो चली गई हैं या फिलहाल रुकी हुई हैं। खाने-पीने की चीजों से लेकर दवाइयों, गाड़ियों और इलेक्ट्रॉनिक सामान तक—हर चीज के दाम अचानक बढ़ गए हैं। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि बाजार में रोज कीमतें बदल रही हैं। दुकानदार और ग्राहक दोनों ही असमंजस में हैं कि सामान खरीदें या इंतजार करें। कई जगहों पर सामान की कमी भी देखने को मिल रही है, जिससे कीमतें और तेजी से बढ़ रही हैं।

ईरान की मुद्रा ‘रियाल’ भी रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई है। खुले बाजार में एक डॉलर के मुकाबले इसकी कीमत करीब अठारह लाख चालीस हजार रियाल तक गिर गई है। इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है, क्योंकि उनकी कमाई के मुकाबले खर्च बहुत ज्यादा बढ़ गया है।

हालात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अमेरिका में बारह सौ डॉलर में मिलने वाला एक स्मार्टफोन तेहरान में करीब दो हजार सात सौ पचास डॉलर के बराबर कीमत पर बेचा जा रहा है। वहीं, एक साधारण कार की कीमत भी कई गुना बढ़ चुकी है। कुछ दुकानदार तो अनिश्चितता के चलते सामान बेचने से भी बच रहे हैं।

इस संकट के पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं—लगातार युद्ध का माहौल, अमेरिका के आर्थिक प्रतिबंध, समुद्री नाकेबंदी और इंटरनेट पर लगभग पूरी तरह से रोक। बताया जा रहा है कि देश में चौंसठ दिनों से ज्यादा समय से इंटरनेट बंद है, जिससे कारोबार और सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।

ईरान की आबादी करीब नौ करोड़ है और इस समय बड़ी संख्या में लोग आर्थिक दबाव झेल रहे हैं। न्यूनतम मासिक वेतन करीब सत्रह करोड़ रियाल है, जो बढ़ती महंगाई के सामने बेहद कम साबित हो रहा है। सरकार कुछ जरूरी सामानों पर सब्सिडी दे रही है, लेकिन वह भी बहुत सीमित है।

एक स्थानीय नागरिक ने कहा, “आमदनी और खर्च का कोई तालमेल नहीं बचा है। जो पैसा है, उसे जल्दी खर्च करना पड़ रहा है, क्योंकि कल वही चीज और महंगी हो सकती है।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश की बड़ी-बड़ी कंपनियां भी प्रभावित हुई हैं। कई उद्योगों में कर्मचारियों की छंटनी हो रही है और उत्पादन धीमा पड़ गया है। टेक्नोलॉजी कंपनियों से लेकर स्टील उद्योग तक, हर क्षेत्र में दबाव देखा जा रहा है।

इसी बीच ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने कहा है कि देश को केवल सैन्य नहीं, बल्कि आर्थिक और सांस्कृतिक मोर्चे पर भी अपने दुश्मनों को हराना होगा। उन्होंने कंपनियों से अपील की है कि वे कर्मचारियों को नौकरी से निकालने से बचें।

जमीनी सच्चाई यह है कि हालात अभी भी काफी कठिन हैं और लोगों की परेशानियां कम होती नजर नहीं आ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक युद्ध और प्रतिबंधों का असर जारी रहेगा, तब तक ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बना रहेगा। ईरान इस समय एक गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है, जहां महंगाई, बेरोजगारी और अनिश्चितता ने आम आदमी की जिंदगी को मुश्किल बना दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि हालात कब और कैसे सुधरेंगे।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments