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WATCH VIDEO: दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत से वैश्विक लोकतांत्रिक संवाद को नई दिशा मिलेगी — ओम बिरला

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महेंद्र कुमार | नई दिल्ली | 15 जनवरी 2026

भारत की संसद 14 से 16 जनवरी तक CSPOC 2026 (28वां कॉन्फ्रेंस ऑफ स्पीकर्स एंड प्रेसाइडिंग ऑफिसर्स ऑफ द कॉमनवेल्थ) की ऐतिहासिक मेज़बानी कर रही है। इस अवसर पर दुनिया भर के संसद अध्यक्ष, प्रेसाइडिंग ऑफिसर्स, नीति-निर्माता और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़े प्रतिनिधि नई दिल्ली में एकत्र हुए हैं। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य लोकतांत्रिक संवाद को मजबूत करना, आपसी सहयोग बढ़ाना और उन साझा मूल्यों पर विचार करना है, जिन पर लोकतंत्र टिका हुआ है।

सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि भारत, दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने के नाते, आज वैश्विक लोकतांत्रिक संवाद का एक सशक्त और भरोसेमंद मंच बन चुका है। उन्होंने कहा, “हम आज यहां भारत में इसलिए एकत्र हुए हैं, ताकि लोकतांत्रिक संवाद, सहयोग और साझा मूल्यों को और मजबूत किया जा सके। अलग-अलग देशों की संसदों के बीच संवाद न केवल आपसी समझ बढ़ाता है, बल्कि वैश्विक चुनौतियों के लोकतांत्रिक समाधान का रास्ता भी दिखाता है।”

ओम बिरला ने स्पष्ट किया कि भारतीय लोकतंत्र केवल चुनावी प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समावेशिता, सहमति और संवाद की मजबूत परंपरा पर आधारित है। उन्होंने कहा कि भारतीय संसद ने समय-समय पर ऐसे कानून और नीतियां बनाई हैं, जिनका उद्देश्य समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलना और लोकतंत्र को जमीनी स्तर पर मजबूत करना है। उनके अनुसार, CSPOC जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच लोकतंत्र की इन्हीं मूल भावनाओं को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाने का काम करते हैं।

तीन दिवसीय इस सम्मेलन में डिजिटल लोकतंत्र, संसदों की बदलती भूमिका, वैश्विक सहयोग, शांति और स्थिरता जैसे अहम विषयों पर विस्तार से चर्चा हो रही है। विभिन्न सत्रों में इस बात पर भी मंथन किया जा रहा है कि तेजी से बदलते वैश्विक और तकनीकी हालात में लोकतांत्रिक संस्थाएं खुद को कैसे और अधिक प्रभावी बना सकती हैं तथा आम नागरिकों की भागीदारी को कैसे बढ़ाया जा सकता है।

CSPOC 2026 का उद्घाटन माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया। सम्मेलन में IPU और CPA के प्रेसिडेंट्स सहित कॉमनवेल्थ देशों और सेमी-ऑटोनॉमस पार्लियामेंट्स के 61 स्पीकर्स और प्रेसाइडिंग ऑफिसर्स भाग ले रहे हैं। इस लिहाज से यह CSPOC के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा सम्मेलन माना जा रहा है। CSPOC का उद्देश्य राष्ट्रमंडल देशों की संसदों में निष्पक्षता बनाए रखना, संसदीय लोकतंत्र को सुदृढ़ करना और लोकतांत्रिक संस्थाओं को और अधिक सशक्त बनाना है।

गौरतलब है कि भारत इससे पहले 1971, 1986 और 2010 में भी CSPOC की सफल मेज़बानी कर चुका है। 28वें CSPOC के प्रमुख विषयों में शामिल हैं—

संसदीय कार्यप्रणाली में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस और सोशल मीडिया का उपयोग
संसदों में नवाचार और नागरिक सहभागिता को बढ़ावा
सांसदों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण

निश्चित तौर पर, CSPOC 2026 भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं, तकनीकी प्रगति और वैश्विक संसदीय सहयोग के प्रति उसकी मजबूत प्रतिबद्धता को विश्व मंच पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।

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