[the_ad id="179"]
Home » National » भ्रष्टाचार कानून की धारा 17A पर सुप्रीम कोर्ट का बंटा हुआ फैसला, अब बड़ी बेंच करेगी अंतिम फैसला

भ्रष्टाचार कानून की धारा 17A पर सुप्रीम कोर्ट का बंटा हुआ फैसला, अब बड़ी बेंच करेगी अंतिम फैसला

अवधेश कुमार | 15 जनवरी 2026

नई दिल्ली। भ्रष्टाचार से जुड़े कानून Prevention of Corruption Act की धारा 17A की वैधता पर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई, लेकिन इस पर अदालत एकमत नहीं हो सकी। सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की पीठ ने इस मामले में स्प्लिट वर्डिक्ट यानी बंटा हुआ फैसला सुनाया। इसका मतलब यह हुआ कि दोनों जज इस मुद्दे पर अलग-अलग राय रखते हैं और फिलहाल कोई अंतिम फैसला नहीं आया है। धारा 17A का सीधा संबंध सरकारी अधिकारियों से जुड़ा है। इस धारा के तहत किसी भी लोक सेवक (सरकारी अधिकारी) के खिलाफ जांच शुरू करने से पहले सरकार की पूर्व अनुमति (prior sanction) जरूरी होती है, अगर आरोप उसके आधिकारिक कामकाज से जुड़े हों। इसी प्रावधान को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यह धारा भ्रष्टाचार की जांच में रुकावट बनती है और अधिकारियों को बचाने का जरिया बन सकती है।

सुनवाई के दौरान एक जज की राय थी कि धारा 17A जरूरी है, ताकि ईमानदार अधिकारियों को बेवजह की जांच और परेशानियों से बचाया जा सके। वहीं दूसरे जज का मानना था कि यह प्रावधान जांच एजेंसियों के हाथ बांध देता है और भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई को कमजोर करता है। दोनों की राय अलग-अलग होने के कारण अदालत कोई स्पष्ट निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी।

अब इस मामले को बड़ी संविधान पीठ (लार्जर बेंच) के पास भेजा जाएगा, जो इस पर अंतिम और निर्णायक फैसला करेगी। यह फैसला बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसका असर भविष्य में भ्रष्टाचार के मामलों की जांच, जांच एजेंसियों की भूमिका और सरकारी अधिकारियों की जवाबदेही पर पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट का यह बंटा हुआ फैसला दिखाता है कि भ्रष्टाचार से लड़ने और ईमानदार अधिकारियों की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना कितना जटिल मुद्दा है। अब देश की निगाहें बड़ी बेंच पर टिकी हैं, जो तय करेगी कि धारा 17A आगे भी इसी रूप में लागू रहेगी या नहीं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *