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WATCH VIDEO — अंकिता भंडारी मर्डर केस: देहरादून में उमड़ा जनसैलाब, CBI जांच की मांग सड़कों पर उतरा जनसैलाब

शैलेन्द्र नेगी | देहरादून 4 जनवरी 2026

पुलिस ने 2 किलोमीटर पहले रोका, तीखी नोकझोंक

देहरादून में रविवार को हजारों लोगों का हुजूम सड़कों पर उतर आया। महिलाएं, छात्र, सामाजिक संगठन और आम नागरिक अंकिता भंडारी मर्डर केस में सामने आए नए आरोपों और सवालों के बाद सीबीआई जांच की मांग कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने पहले परेड ग्राउंड में सभा की और फिर मुख्यमंत्री आवास की ओर पैदल मार्च शुरू किया। माहौल गुस्से और दर्द से भरा हुआ था—लोगों का कहना था कि उन्हें अब आधी-अधूरी जांच नहीं, बल्कि पूरी सच्चाई चाहिए। जैसे ही मार्च आगे बढ़ा, मुख्यमंत्री आवास से करीब 2 किलोमीटर पहले भारी पुलिस बल ने भीड़ को रोक लिया। इसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। काफी देर तक बहस चलती रही, लेकिन सुरक्षा कारणों का हवाला देकर पुलिस ने आगे बढ़ने नहीं दिया। गुस्से में कुछ प्रदर्शनकारियों ने दिलाराम चौक पर लगे मुख्यमंत्री के बैनर भी फाड़ दिए। इसके बावजूद भीड़ शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग दोहराती रही—सीबीआई जांच कराई जाए।

सरकार का रुख सख्त: न VIP, न CBI जांच

सरकार की ओर से साफ कहा गया कि न तो कोई VIP शामिल था और न ही CBI जांच कराई जाएगी। यही बयान प्रदर्शनकारियों के गुस्से की बड़ी वजह बना। लोगों का कहना था कि अगर जांच पूरी तरह साफ है, तो स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने में क्या दिक्कत है। कई महिलाओं ने कहा कि यह मामला सिर्फ एक परिवार का नहीं, बल्कि उत्तराखंड की बेटियों की सुरक्षा से जुड़ा है।

पुराने फैसले के बाद भी नए सवाल

यह मामला 2022 में 19 साल की अंकिता भंडारी की हत्या से जुड़ा है। अदालत ने मई 2025 में तीन आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। आरोप था कि अंकिता ने “स्पेशल सर्विस” की मांग मानने से इनकार किया, जिसके बाद उसे नहर में धकेल दिया गया। हाल के दिनों में एक्ट्रेस उर्मिला सनावर के वीडियो सामने आने के बाद एक कथित बीजेपी ‘VIP’ का नाम उछला, जिसे पुलिस ने खारिज करते हुए कहा कि वह केवल अंकिता का परिचित था। इसी विरोधाभास ने लोगों को फिर सड़कों पर ला खड़ा किया।

राज्यभर में फैल रहा आंदोलन

देहरादून के साथ-साथ उत्तराखंड के कई जिलों और दिल्ली में भी प्रदर्शन हुए। आयोजकों ने चेतावनी दी है कि अगर पारदर्शिता नहीं दिखाई गई और मांगों को नजरअंदाज किया गया, तो राज्यव्यापी आंदोलन तेज किया जाएगा। आंदोलन में महिलाओं की बड़ी भागीदारी दिखी, जिन्होंने कहा कि उन्हें न्याय मिलने तक पीछे हटना मंजूर नहीं।

जनता का सवाल: भरोसा कैसे बने?

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र CBI जांच ही भरोसा बहाल कर सकती है। उनका आरोप है कि बीजेपी दबाव में है और दोषियों को बचाने की कोशिश हो रही है। वहीं, सरकार इन आरोपों से इनकार करती रही है। कुल मिलाकर, देहरादून की सड़कों पर उतरा यह जनसैलाब एक ही सवाल पूछ रहा है—अंकिता को पूरा न्याय कब मिलेगा?

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