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मासूमों पर जंग की मार: ईरान में 2,100 से ज्यादा बच्चे घायल, अस्पतालों तक नहीं बचे सुरक्षित

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली/तेहरान | 12 अप्रैल 2026

मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच एक ऐसी भयावह तस्वीर सामने आई है, जिसने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया है। Iran के आपातकालीन विभाग के प्रमुख जाफर मियादफर के अनुसार, अमेरिका और इज़रायल के हमलों में अब तक 18 वर्ष से कम उम्र के 2,115 बच्चे घायल हो चुके हैं। यह आंकड़ा सिर्फ एक संख्या नहीं, बल्कि उन मासूम जिंदगियों की दर्दनाक कहानी है जो इस संघर्ष की आग में झुलस रही हैं। जंग के इस दौर में सबसे ज्यादा कीमत वही चुका रहे हैं, जिनका इस टकराव से कोई लेना-देना नहीं—बच्चे।

मियादफर के मुताबिक, इन घायलों में बड़ी संख्या बेहद छोटे बच्चों की है। करीब 124 बच्चे पांच साल से कम उम्र के हैं, जबकि कई ऐसे भी हैं जो अभी ठीक से बोल भी नहीं सकते। यह तथ्य इस संघर्ष की भयावहता को और गहरा कर देता है, क्योंकि इससे साफ होता है कि जंग अब केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रही, बल्कि आम जिंदगी के बीच उतर आई है—जहां घर, स्कूल और यहां तक कि अस्पताल भी सुरक्षित नहीं बचे।

रिपोर्ट्स के अनुसार, तेहरान, खुज़ेस्तान, लोरिस्तान, इस्फहान, केरमानशाह और इलाम जैसे कई प्रांत इस हमले से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि अस्पतालों, एंबुलेंस और मेडिकल सुविधाओं तक को नुकसान पहुंचा है। जिन जगहों पर जिंदगी बचाई जाती है, वही अब खुद जख्मी हैं। ऐसे हालात में घायल बच्चों और महिलाओं का इलाज करना एक बड़ी चुनौती बन गया है, और स्वास्थ्य व्यवस्था पर भारी दबाव साफ नजर आ रहा है।

विशेषज्ञ इस स्थिति को केवल एक सैन्य संघर्ष नहीं, बल्कि तेजी से गहराते मानवीय संकट के रूप में देख रहे हैं। जब स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होती हैं और बच्चे बड़ी संख्या में घायल होते हैं, तो यह किसी भी समाज के लिए गंभीर चेतावनी होती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ रही है, लेकिन हालात में सुधार के लिए अब तक कोई ठोस और प्रभावी कदम सामने नहीं आ पाया है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच कूटनीतिक प्रयास भी कमजोर पड़ते नजर आ रहे हैं। इस्लामाबाद में हाल ही में हुई अमेरिका-ईरान वार्ता बिना किसी समझौते के खत्म हो गई, जिससे यह साफ हो गया कि फिलहाल समाधान की राह आसान नहीं है। ऐसे में यह सवाल और गहरा हो जाता है कि अगर बातचीत से रास्ता नहीं निकल रहा, तो क्या यह संघर्ष और ज्यादा खतरनाक मोड़ ले सकता है?

यह जंग केवल ताकत या राजनीति की कहानी नहीं रह गई है, बल्कि यह उन मासूम चेहरों की त्रासदी बन चुकी है जो हर दिन इसकी कीमत चुका रहे हैं। “2,000 से ज्यादा घायल बच्चे”—यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक चेतावनी है कि युद्ध की असली मार हमेशा बेगुनाहों पर ही पड़ती है।

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