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विराट और रोहित ने बल्ले से दिया बीसीसीआई, आगरकर और गंभीर को जवाब

संजीव कुमार । रांची 30 नवंबर 2025

रांची वनडे में विराट कोहली और रोहित शर्मा की बैटिंग सिर्फ रन बनाने की प्रक्रिया नहीं थी—यह बीसीसीआई, मुख्य चयनकर्ता अजित आगरकर और टीम इंडिया के कोच गौतम गंभीर के खिलाफ एक सीधा, सटीक और करारा जवाब था। दोनों खिलाड़ियों ने जिस तरह मैदान पर अपना गुस्सा, प्रतिष्ठा और क्लास मिलाकर प्रदर्शन किया, उसने साफ कर दिया कि उन्हें टेस्ट क्रिकेट से बाहर करने की जो जल्दबाज़ी और राजनीति चली गई थी, वह भारतीय क्रिकेट के इतिहास की सबसे बड़ी भूलों में से एक साबित हो रही है। विराट का आक्रामक हाई-जंप सेलिब्रेशन और रोहित की बिना किसी दबाव के चलाई गई पारी इस बात का प्रतीक थे कि दोनों अब केवल खेल नहीं रहे—वे एक व्यवस्था के खिलाफ लड़ रहे हैं जिसने उनके योगदान को, उनके अनुभव को और उनकी जगह को हल्के में लिया।

विराट कोहली का 52वां वनडे शतक और रोहित शर्मा की दमदार साझेदारी ने पूरे विश्व को यह संदेश दिया कि अभी यह दोनों दिग्गज खत्म नहीं हुए हैं, बल्कि उन्हें किनारे करने की कोशिश करने वाले लोग वास्तव में भारतीय क्रिकेट की समझ से दूर हैं। आगरकर और गंभीर ने ‘नयी टीम’ बनाने के नाम पर जिस तरह अनुभवी खिलाड़ियों को अचानक टेस्ट से निकाल दिया, वह न क्रिकेटिंग समझ दर्शाता है, न मैनेजमेंट का संतुलन। भारतीय क्रिकेट का ये दो स्तंभ—एक दुनिया का बेस्ट चेज़र और दूसरा दुनिया का सबसे खतरनाक ओपनर—ऐसे फैसलों से विचलित नहीं हुए। बल्कि उन्होंने अपने बल्ले से दिखा दिया कि क्रिकेट में जवाब प्रेस कॉन्फ्रेंस से नहीं, रणनीति से नहीं, रन से दिया जाता है।

यह भी ध्यान देने की बात है कि विराट और रोहित ने कभी कैमरे के सामने शिकायत नहीं की। उन्होंने बीसीसीआई के खिलाफ कोई बयानबाज़ी नहीं की। क्योंकि उनके पास ऐसा हथियार है जिसकी आवाज़ पूरी दुनिया सुनती है—उनका बल्ला। और इसी बल्ले ने रांची में साफ कर दिया कि उन्हें टेस्ट टीम से बाहर करना कोई ‘क्रिकेटिंग निर्णय’ नहीं, बल्कि चयनकर्ताओं और कोच की राजनीतिक और अहंकारी भूल थी। विराट के हर चौके में यह तीखी चिंगारी दिख रही थी कि उन्हें गलत जगह चोट पहुंचाई गई है। रोहित के हर स्ट्रोक में भी वही विश्वास था कि उन्हें किसी भी फॉर्मेट में रोकना असंभव है।

आज स्थिति यह है कि रोहित और विराट सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट की उस प्रतिष्ठा के लिए भी लड़ रहे हैं जिसे कुछ लोगों की तेजी में लिए गए गलत फैसलों ने नुकसान पहुंचाया। रांची के मैदान ने यह साबित कर दिया कि अनुभव को हटाकर युवा टीम नहीं बनती—युवा टीम अनुभव के साथ खड़ी होती है। गंभीर और आगरकर की जोड़ी इस बुनियादी बात को समझने में नाकाम रही है। और आज जब कोहली–रोहित जैसी जोड़ी अपनी क्लास दिखा रही है, तो यह सिर्फ रन नहीं, बल्कि चयनकर्ताओं पर दर्ज की गई एक लंबी चार्जशीट भी है।

विराट और रोहित ने यह साबित कर दिया है कि क्रिकेट में आवाज़ उठाने का सबसे सही तरीका रन बनाना है। यह उनका शांत प्रतिरोध नहीं था—यह एक गूंजता हुआ घोषणा-पत्र था कि उन्हें हटाकर भारतीय क्रिकेट आगे नहीं बढ़ सकता। और अब यह पूरी दुनिया देख रही है कि दिग्गजों को दरकिनार करना कितना खतरनाक और हास्यास्पद फैसला था। विराट और रोहित ने सिर्फ खेला नहीं—उन्होंने बीसीसीआई, आगरकर और गंभीर को बल्ले से जवाब दिया।

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