राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 29 जुलाई 2026
राज्यसभा ने बुधवार को राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के अपमान को दंडनीय अपराध बनाने वाले राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। विपक्षी दलों के विरोध और हंगामे के बीच सदन ने इस महत्वपूर्ण विधेयक को मंजूरी दी।
यह संशोधन विधेयक राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े मौजूदा कानून में बदलाव का प्रावधान करता है। इसके तहत अब ‘वंदे मातरम्’ के अपमान को भी कानून के दायरे में लाते हुए इसे आपराधिक अपराध माना जाएगा। सरकार का कहना है कि यह कदम राष्ट्रीय प्रतीकों और राष्ट्रीय सम्मान की रक्षा के उद्देश्य से उठाया गया है।
विधेयक पर चर्चा के दौरान सदन में विपक्ष का विरोध जारी रहा। विपक्षी दल लगातार दिल्ली में NEET पेपर लीक विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाब की मांग कर रहे थे। इसी मुद्दे पर विपक्ष ने सदन में नारेबाजी की और सरकार को घेरने की कोशिश की।
चर्चा के दौरान जब केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले विधेयक पर बोल रहे थे, तब विपक्षी दलों के सदस्यों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। विपक्ष का कहना था कि सरकार पहले छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई पर अपनी स्थिति स्पष्ट करे और गृह मंत्री सदन में आकर जवाब दें।
सरकार ने हालांकि विधेयक को राष्ट्रीय सम्मान से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम बताते हुए विपक्ष के विरोध के बावजूद इसे पारित कराने का फैसला किया। ध्वनिमत से विधेयक पारित होने के साथ ही इसे संसद के उच्च सदन की मंजूरी मिल गई।
‘वंदे मातरम्’ भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह गीत देशभक्ति और आजादी के संघर्ष का प्रमुख प्रतीक रहा है। सरकार का तर्क है कि राष्ट्रीय गीत का सम्मान बनाए रखने और उसके अपमान को रोकने के लिए कानूनी प्रावधान आवश्यक हैं।
दूसरी ओर, विपक्ष ने विधेयक के गुण-दोष पर विस्तृत चर्चा में भाग लेने के बजाय छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई के मुद्दे को प्राथमिकता दी। विपक्ष का आरोप है कि सरकार छात्रों की आवाज सुनने के बजाय विपक्ष के सवालों से बच रही है।
राज्यसभा से पारित होने के बाद यह विधेयक अब आगे की संवैधानिक प्रक्रिया के तहत राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद यह संशोधित कानून पूरे देश में लागू हो जाएगा।
संसद के मानसून सत्र में यह विधेयक उन प्रमुख कानूनों में शामिल है, जिन पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखा राजनीतिक टकराव देखने को मिला। एक ओर सरकार इसे राष्ट्रीय सम्मान की रक्षा के लिए आवश्यक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष सदन के भीतर और बाहर छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार पर लगातार हमलावर बना हुआ है।




