अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन | 4 अगस्त 2026
ईरान युद्ध के बीच अमेरिका अपने प्रमुख हथियारों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले Critical Minerals यानी महत्वपूर्ण खनिजों के लिए चीन पर निर्भरता कम करने की कोशिश तेज कर रहा है। अमेरिकी कंपनियां घरेलू स्तर पर इन खनिजों की प्रोसेसिंग और उत्पादन क्षमता बढ़ाने में जुटी हैं, लेकिन नई सप्लाई चेन तैयार करने में कई साल लग सकते हैं।
न्यू हैम्पशायर स्थित Phoenix Tailings जैसी कंपनियां खनन से निकले अपशिष्ट से बिजली आधारित प्रक्रिया के जरिए महत्वपूर्ण खनिज निकाल रही हैं। इनका इस्तेमाल अमेरिकी हथियार प्रणालियों सहित कई हाई-टेक उपकरणों में किया जाता है।
कंपनी को उत्पादन बढ़ाने के लिए पेंटागन से 500 मिलियन डॉलर का ऋण मिला है। हालांकि नई फैक्ट्री तैयार करने में करीब डेढ़ साल लग सकता है। आठ साल पहले एक छोटे प्रयोग के रूप में शुरू हुई कंपनी अब अमेरिका की रणनीतिक खनिज आपूर्ति मजबूत करने की कोशिश का हिस्सा बन गई है।
इस अभियान की अहमियत ईरान संघर्ष के कारण और बढ़ गई है। युद्ध में Tomahawk क्रूज मिसाइलों और THAAD इंटरसेप्टर्स जैसे महत्वपूर्ण हथियारों के भंडार पर दबाव बढ़ा है। व्हाइट हाउस रक्षा कंपनियों से उत्पादन की रफ्तार बढ़ाने को कह रहा है, वहीं चीन से महत्वपूर्ण खनिजों की खरीद को लेकर नियम भी कड़े किए जा रहे हैं।
Phoenix Tailings के सह-संस्थापक और मुख्य वाणिज्यिक अधिकारी एंथनी बैलाडोन के मुताबिक, रक्षा क्षेत्र की मांग और नए नियमों के अनुरूप कम समय में हथियारों का भंडार दोबारा तैयार करना और उत्पादन बढ़ाना बड़ी चुनौती होगी।
अमेरिका के सामने समस्या केवल खनिज निकालने की नहीं है। आधुनिक हथियारों और दूसरी हाई-टेक तकनीकों में इस्तेमाल होने वाले शक्तिशाली मैग्नेट और उनके लिए जरूरी खनिजों की प्रोसेसिंग में चीन की मजबूत स्थिति लंबे समय से अमेरिकी रणनीतिक चिंता का विषय रही है।
अमेरिका अब नई खदानों, घरेलू प्रोसेसिंग और पुराने खनन अपशिष्ट से महत्वपूर्ण तत्व निकालने जैसे विकल्पों पर एक साथ काम कर रहा है। मौजूदा खनन कचरे से खनिज निकालना तत्काल मांग का कुछ हिस्सा पूरा कर सकता है, लेकिन पूरी सप्लाई चेन को चीन की निर्भरता से बाहर निकालना लंबी प्रक्रिया होगी।
ईरान युद्ध ने इस चुनौती को केवल व्यापार और उद्योग का मुद्दा नहीं रहने दिया है। Critical Minerals अब अमेरिका के लिए रक्षा उत्पादन, हथियारों की उपलब्धता और राष्ट्रीय सुरक्षा से सीधे जुड़ा रणनीतिक सवाल बन गए हैं।




