शिक्षा | ABC NATIONAL NEWS | मुंबई | 19 सितंबर 2026
IIT-बॉम्बे में एक छात्र की कथित आत्महत्या के बाद कैंपस में विरोध-प्रदर्शन तेज हो गया है। शुक्रवार को छात्र का शव मिलने के बाद शनिवार सुबह उसके माता-पिता भी संस्थान के मुख्य द्वार पर चल रहे छात्रों के प्रदर्शन में शामिल हुए। परिवार ने अपने बेटे की मौत को लेकर संस्थान से स्पष्ट जवाब मांगा है और कहा है कि जब तक उन्हें पूरी जानकारी नहीं मिलती, वे मुख्य द्वार से नहीं हटेंगे।
छात्र के माता-पिता ने कहा कि वह उनका इकलौता बेटा था और बेहद कठिन आर्थिक परिस्थितियों से निकलकर IIT-बॉम्बे पहुंचा था। परिवार के अनुसार, वह संघर्ष करने वाला छात्र था और आसानी से हार मानने वाला नहीं था। माता-पिता ने कैंपस में कथित भेदभाव को भी उन संभावित कारणों में शामिल किया है जिनकी जांच होनी चाहिए। हालांकि, छात्र की मौत का वास्तविक कारण अभी जांच का विषय है और किसी एक वजह को जिम्मेदार मानना जल्दबाजी होगी।
यह मामला इसलिए भी चर्चा में आया है क्योंकि छात्र को कथित तौर पर एक परीक्षा के दौरान ChatGPT के इस्तेमाल के आरोप में परीक्षा से बाहर किया गया था। इसके कुछ समय बाद उसकी मौत की खबर सामने आई। छात्रों ने इसी घटनाक्रम को लेकर संस्थान प्रशासन से जवाब और पारदर्शी जांच की मांग की है। हालांकि, केवल घटनाओं के क्रम के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि परीक्षा से जुड़ी कार्रवाई ही मौत का कारण थी।
छात्रों ने शुक्रवार रात से ही IIT-बॉम्बे के मुख्य द्वार पर विरोध शुरू कर दिया था। देर रात संस्थान के निदेशक ने Convocation Hall में छात्रों से बातचीत की, लेकिन छात्रों का कहना था कि उन्हें चर्चा से संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद प्रदर्शन रातभर जारी रहा और शनिवार सुबह 100 से अधिक छात्र फिर मुख्य द्वार पर जमा हुए।
प्रदर्शन कर रहे छात्रों और छात्र संगठनों ने प्रशासन से कई सवालों के जवाब मांगे हैं। उनका कहना है कि छात्र की मौत की परिस्थितियों को स्पष्ट किया जाना चाहिए और कैंपस में छात्रों पर पड़ने वाले शैक्षणिक तथा मानसिक दबाव को गंभीरता से देखा जाना चाहिए। सोशल मीडिया पर भी छात्रों ने न्याय और जवाबदेही की मांग को लेकर अभियान शुरू किया है।
रात में छात्रों से बातचीत के दौरान IIT-बॉम्बे के निदेशक ने कहा कि संस्थान छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर और ज्यादा ध्यान देगा। संस्थान के अनुसार कैंपस में फिलहाल आठ मनोवैज्ञानिक सलाहकार के तौर पर उपलब्ध हैं और छात्रों को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता देने के लिए कई व्यवस्थाएं पहले से मौजूद हैं।
लेकिन छात्रों और परिवार की मांग सिर्फ काउंसलिंग व्यवस्था बढ़ाने तक सीमित नहीं है। परिवार यह जानना चाहता है कि उनके बेटे के साथ परीक्षा के दौरान क्या हुआ, उसके बाद संस्थान में क्या प्रक्रिया अपनाई गई और उसकी मौत से पहले की परिस्थितियां क्या थीं। इन सवालों के जवाब तथ्यात्मक जांच और संस्थान के रिकॉर्ड से ही सामने आ सकते हैं।
इस घटना ने देश के सबसे प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों पर पड़ने वाले शैक्षणिक दबाव, परीक्षा संबंधी नियमों, अनुशासनात्मक कार्रवाई और मानसिक स्वास्थ्य सहायता को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। IIT जैसे संस्थानों में शैक्षणिक ईमानदारी और परीक्षा नियमों का पालन जरूरी है, लेकिन किसी छात्र पर अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ उसकी मानसिक और भावनात्मक स्थिति को भी गंभीरता से देखना महत्वपूर्ण है।
फिलहाल छात्र की मौत की परिस्थितियों की पूरी तस्वीर सामने आना बाकी है। इसलिए इस समय सबसे जरूरी सवाल आरोप लगाने से ज्यादा सच्चाई सामने लाना, परिवार को स्पष्ट जवाब देना और स्वतंत्र तथा निष्पक्ष तरीके से पूरे घटनाक्रम की जांच करना है। परिवार और छात्रों की यही मांग है कि संस्थान इस मामले में पारदर्शिता बरते और हर सवाल का तथ्य के आधार पर जवाब दे।



