अनिल यादव | लखनऊ 8 जनवरी 2026
उत्तर प्रदेश में SIR के बाद जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट को लेकर सियासत गरमा गई है। समाजवादी पार्टी ने चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोलते हुए गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही दावा कर चुके थे कि करीब 4 करोड़ नाम वोटर लिस्ट से कट रहे हैं, लेकिन इसके बाद चुनाव आयोग की सक्रियता से लगभग 1 करोड़ नए नाम अचानक जोड़ दिए गए। समाजवादी पार्टी ने पूछा है कि ये नाम आखिर कहां से आए और किस आधार पर जुड़े? समाजवादी पार्टी के मीडिया सेल ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर कहा कि यह साफ किया जाना चाहिए कि क्या पहले गड़बड़ी हो रही थी, या अब की जा रही है, या फिर चुन-चुनकर बेईमानी की जा रही है। पार्टी ने चुनाव आयोग से पारदर्शिता की मांग करते हुए कहा कि मतदाता सूची लोकतंत्र की रीढ़ है और इसमें किसी भी तरह का संदेह पूरे चुनावी तंत्र पर सवाल खड़े करता है।
पार्टी ने अखबारों में प्रकाशित खबरों का हवाला देते हुए कहा कि SIR के बाद यूपी में करीब तीन करोड़ नाम काटे गए, जिनमें मृत, स्थानांतरित, डुप्लीकेट और अपात्र मतदाताओं के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। लेकिन इसके साथ ही नए नामों का अचानक जुड़ना गंभीर चिंता का विषय है। समाजवादी पार्टी का कहना है कि चुनाव आयोग को यह स्पष्ट करना होगा कि एक करोड़ नए नाम किस प्रक्रिया से और किन मानकों पर जोड़े गए।
समाजवादी पार्टी ने यह भी चेतावनी दी कि यदि इस पूरे मामले पर संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया, तो यह मुद्दा न्यायालय तक जाएगा। पार्टी ने कहा कि चुनाव आयोग को यह समझ लेना चाहिए कि न्यायिक जांच से कोई नहीं बच पाएगा, क्योंकि अदालत में हर सवाल का ठोस जवाब देना पड़ेगा। समाजवादी पार्टी ने मांग की कि मतदाता सूची में हुए हर बदलाव का जिला-वार, कारण-वार और समय-सीमा के साथ पूरा ब्यौरा सार्वजनिक किया जाए, ताकि जनता का भरोसा लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर बना रहे।




