राजनीति/ चुनाव | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 24 सितंबर 2026
नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 में SIR से जुड़े सवाल को लेकर चुनाव आयोग के भीतर गंभीर मतभेद सामने आए हैं। द इंडियन एक्सप्रेस की जांच के मुताबिक, चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने इस बदलाव पर लिखित आपत्ति दर्ज की थी। दोनों का कहना था कि कानून में निर्धारित Form 6 को Registration of Electors Rules, 1960 में बदलाव किए बिना बदला नहीं जा सकता।
मामला उस बदलाव से जुड़ा है, जिसमें नए मतदाताओं से पूछा गया कि क्या उनका नाम पिछली SIR के दौरान तैयार मतदाता सूची में था, क्या उनके माता-पिता या दादा-दादी का नाम उस सूची में था, या फिर इनमें से किसी का नाम उस सूची में नहीं था। रिपोर्ट के अनुसार, यह हिस्सा Form 6 में अनिवार्य के तौर पर चिन्हित नहीं था, लेकिन आवेदक इस सवाल का जवाब दिए बिना फॉर्म आगे जमा नहीं कर पा रहे थे।
16 मई को चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने इस प्रस्ताव पर अपनी आपत्ति दर्ज की थी। उनके अनुसार, SIR के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले फॉर्म इस विशेष प्रक्रिया के लिए बनाए गए थे और उन्हें वैधानिक फॉर्म नहीं माना जा सकता, जबकि Form 6 और Form 8 कानून के तहत निर्धारित फॉर्म हैं। इसलिए इनमें बदलाव करने के लिए Registration of Electors Rules, 1960 में संशोधन जरूरी होगा। उन्होंने प्रस्ताव को सरकार के पास भेजने की बात भी कही थी।
इसके बाद 19 मई को चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने भी जोशी की राय से सहमति जताई। लेकिन द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, बाद में SIR से जुड़ा नया सवाल Form 6 में दिखाई देता रहा। 13 अगस्त को संधू ने इस बदलाव को लेकर संबंधित अधिकारियों को लिखा और CEC ज्ञानेश कुमार तथा चुनाव आयुक्त विवेक जोशी को भी इसकी प्रति भेजी।
संधू ने अपने पत्र में कहा कि दो चुनाव आयुक्तों की स्पष्ट राय के बावजूद Form 6 में किए गए बदलाव हटाए नहीं गए और मूल फॉर्म बहाल नहीं किया गया। उन्होंने बदलाव को “अनधिकृत/अवैध” बताते हुए इसे तत्काल हटाने की मांग की और कहा कि पात्र युवा तथा पहली बार मतदान करने वाले लोग कानून के अनुसार बिना परेशानी मतदाता के तौर पर पंजीकरण करा सकें। यह शब्द संधू की लिखित आपत्ति के संदर्भ में हैं, न कि किसी अदालत द्वारा तय कानूनी निष्कर्ष के रूप में।
इस विवाद का सीधा संबंध नए मतदाताओं से है। 18 वर्ष की उम्र पूरी करने वाला कोई व्यक्ति पहली बार मतदाता बनने के लिए Form 6 भरता है। रिपोर्ट के अनुसार, नए सवाल का असर खास तौर पर उन परिवारों के युवाओं पर पड़ सकता था जिनके माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछली SIR की मतदाता सूची में नहीं था। ऐसे आवेदकों के सामने सवाल उठता था कि वे दिए गए विकल्पों में अपनी स्थिति कैसे दर्ज करें।
Form 6 में बदलाव की कानूनी प्रक्रिया को लेकर भी रिपोर्ट में पुराने उदाहरण का उल्लेख है। 2021 में संसद ने Representation of the People Act, 1950 में संशोधन कर मतदाताओं से Aadhaar संख्या लेने का प्रावधान किया था। इसके बाद 17 जून 2022 को विधि मंत्रालय के Legislative Department ने Registration of Electors Rules और Form 6 में संबंधित बदलाव अधिसूचित किए थे। इसी प्रक्रिया को आधार बनाते हुए दोनों चुनाव आयुक्तों ने इस साल प्रस्तावित बदलाव के लिए भी नियमों में संशोधन की जरूरत बताई थी।
इस पूरे विवाद के बीच चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर SIR 2026 और नए मतदाता के लिए Form 6 की सुविधा उपलब्ध है। आयोग के नागरिक सेवा पोर्टल पर Form 6 के साथ SIR से जुड़ी सेवाएं और पिछली SIR की मतदाता सूची में नाम खोजने की सुविधा भी दिखाई जा रही है।
यह मामला उस व्यापक विवाद का हिस्सा है जिसमें चुनाव आयोग के दो चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कामकाज से जुड़े कई मुद्दों पर लिखित आपत्तियां दर्ज की हैं। द इंडियन एक्सप्रेस की एक अन्य जांच के मुताबिक, आयोग ने इन नोट्स के अस्तित्व, तारीख या सामग्री पर विवाद नहीं किया है, लेकिन उन्हें निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा रहे सुझाव बताया है और कहा है कि पिछले एक साल में आयोग के अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
Form 6 का विवाद इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सीधे पहली बार मतदाता बनने वाले नागरिकों की पंजीकरण प्रक्रिया से जुड़ा है। एक तरफ दो चुनाव आयुक्तों की लिखित आपत्तियां हैं, वहीं दूसरी तरफ चुनाव आयोग का कहना है कि अलग-अलग राय निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा हैं। अब सवाल इस बात पर केंद्रित है कि SIR से जुड़े इस बदलाव के लिए आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया पूरी हुई थी या नहीं और संबंधित Form 6 में बदलाव किस प्रक्रिया के तहत किया गया।



