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ट्रंप का यू-टर्न: रूस से तेल-गैस खरीद पर प्रतिबंध और टैरिफ में छूट

अमेरिकी राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय हित का हवाला देकर जारी किया आदेश; रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर प्रतिबंधों के इस्तेमाल को फिलहाल मिली राहत

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन | 17 अक्टूबर 2026

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने से जुड़े कानून के तहत रूस से तेल और गैस की खरीद पर लागू प्रतिबंधों, पाबंदियों और शुल्कों से छूट देने का आदेश जारी किया है। शुक्रवार रात जारी कार्यकारी आदेश में ट्रंप ने कहा कि मौजूदा समय में कुछ प्रतिबंधों को लागू नहीं करना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है। उन्होंने इस फैसले के समर्थन में अमेरिकी कांग्रेस को औपचारिक प्रमाण-पत्र सौंपने की बात भी कही।

यह फैसला ऐसे समय आया है, जब रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर अमेरिकी प्रतिबंधों और भारी टैरिफ का दबाव अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा बाजारों में चिंता का विषय बना हुआ है। ट्रंप के नए आदेश से रूस से तेल और गैस खरीदने से जुड़े प्रतिबंधों के इस्तेमाल में फिलहाल राहत मिलने का संकेत है।

राष्ट्रीय हित का हवाला देकर रोके प्रतिबंध

ट्रंप ने अपने कार्यकारी आदेश में कहा कि रूस और ईरान पर प्रतिबंधों से जुड़े कानून के कुछ प्रावधानों को इस समय लागू न करना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है। उन्होंने कांग्रेस को इस फैसले के समर्थन में प्रमाण-पत्र भेजने की बात कही।

इस कदम से संकेत मिलता है कि अमेरिकी प्रशासन प्रतिबंधों के मामले में परिस्थितियों के अनुसार बदलाव कर सकता है। हालांकि, आदेश में दी गई छूट का वास्तविक दायरा और अवधि महत्वपूर्ण होंगे। केवल छूट की घोषणा से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि रूस से ऊर्जा खरीद पर लागू सभी प्रतिबंध स्थायी रूप से समाप्त हो गए हैं।

भारत पर टैरिफ के खतरे के बीच अहम फैसला

रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिकी कार्रवाई की चर्चा के बीच ट्रंप का यह फैसला भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है। रूस से ऊर्जा खरीद को लेकर अमेरिका पहले भारत पर भारी टैरिफ लगाने की संभावना से जुड़े प्रावधानों पर चर्चा करता रहा है। ऐसे में प्रतिबंधों और शुल्कों में दी गई छूट की शर्तें भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर असर डाल सकती हैं।

हालांकि, इस आदेश के आधार पर यह मानना जल्दबाजी होगी कि भारत पर प्रस्तावित सभी टैरिफ समाप्त हो गए हैं। इसके लिए यह देखना जरूरी होगा कि छूट किन देशों, किन लेन-देन और किस अवधि पर लागू होती है तथा अमेरिकी प्रशासन भारत के मामले में क्या निर्णय लेता है।

ट्रंप के इस फैसले के बाद अब ध्यान आदेश के विस्तृत प्रावधानों और अमेरिकी प्रशासन के अगले कदमों पर रहेगा।

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