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दीवारों पर दौड़ेगी, हवा में उड़ेगी टेस्ला की नई रोडस्टर! 2028 से पहले बाजार में आना मुश्किल

एलन मस्क ने पेश की रॉकेट तकनीक से प्रेरित इलेक्ट्रिक कार की झलक; प्रदर्शन के दौरान कार ने घुमावदार रैंप से उड़ान भरने और हवा में पलटने के बाद सुरक्षित उतरने का स्टंट दिखाया। कोल्ड-गैस थ्रस्टर्स ने बढ़ाया रोमांच, लेकिन उत्पादन और नियामकीय मंजूरियों की राह अब भी बाकी।

ये है बीजेपी का सुशासन? 32 बच्चों की मौत ने मध्य प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठाए सवाल

बालाघाट के आदिवासी इलाके की 10 वर्षीय काजल सैय्याम डॉक्टर बनना चाहती थी। उसका सपना अधूरा रह गया। बच्चों की मौत ने कुपोषण, बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं और आदिवासी परिवारों की मुश्किलों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अभिजीत दीपके को मजिस्ट्रेट के सामने पेश करेगी पुलिस, नेहा बोरा रिहा; ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च पर दिल्ली में घमासान

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक हिरासत में, BNSS की धाराओं 126/170 के तहत कार्रवाई; SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध तेज

जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल से हटाना लोकतंत्र की आवाज़ को हाशिये पर धकेलने की कोशिश?

33 साल तक सत्ता को जनता के सवालों की याद दिलाता रहा जंतर-मंतर; अब प्रदर्शनकारियों के सामने अपनी आवाज़ लोगों तक पहुंचाने की चुनौती—क्या विरोध को राजधानी के केंद्र से दूर करने की कीमत लोकतंत्र को चुकानी पड़ेगी?

BJP के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी अस्पताल में भर्ती, सीने में संक्रमण के बाद डॉक्टरों की निगरानी में

98 वर्षीय पूर्व उपप्रधानमंत्री को दिल्ली के अपोलो अस्पताल में कराया गया भर्ती, पल्मोनरी विभाग में चल रहा इलाज; डॉक्टरों की टीम कर रही जांच

ट्रंप का यू-टर्न: रूस से तेल-गैस खरीद पर प्रतिबंध और टैरिफ में छूट

अमेरिकी राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय हित का हवाला देकर जारी किया आदेश; रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर प्रतिबंधों के इस्तेमाल को फिलहाल मिली राहत

तिरंगे के साथ प्रदर्शन भी मंजूर नहीं? अभिजीत दीपके हिरासत में, नेहा बोरा रिहा

‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई से भड़का सियासी संग्राम; स्टालिन, ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल ने की निंदा, 23 अक्टूबर को दिल्ली कूच करेंगे किसान

जब हक़ छिनें, आवाज़ दबे और ख़्वाब टूटें—तब सर सैयद और भी ज़रूरी हो जाते हैं!

जब अंधेरे बढ़ते हैं, सर सैयद की रौशनी और ज़रूरी हो जाती है! AMU लाइब्रेरी की जुबानी समझें कि जब हक छिनने लगें, आवाज़ें दबने लगें और नौजवानों के ख्वाब व रोजगार शक के अंधेरे में खोने लगें, तब सर सैयद की वो रोशनी और भी तेज हो जाती है जो इल्म को सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि सोचने, सवाल करने और अपनी जबान आजाद रखने का हथियार मानती थी। अलीगढ़ की लाइब्रेरी आज भी उसी रौशनी को अपने पन्नों में संभाले हुए है।