एबीसी नेशनल न्यूज | 14 जनवरी 2026
तेहरान/वॉशिंगटन — ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी बीच एक अहम खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान की कड़ी धमकियों के बाद अमेरिका मिडिल ईस्ट में मौजूद अपने कुछ सैन्य ठिकानों से सैनिकों को वापस बुलाने पर विचार कर रहा है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर मध्य पूर्व को दुनिया की सुर्खियों में ला दिया है, जहां हालात पहले से ही बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।
हाल ही में ईरान ने खुली चेतावनी दी थी कि अगर अमेरिका ने उसके खिलाफ किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई की, तो मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने और सैनिक सीधे उसके निशाने पर होंगे। तेहरान की इस चेतावनी को अमेरिका ने गंभीरता से लिया है। इसके बाद खबरें आने लगीं कि अमेरिकी प्रशासन अपने सैनिकों और अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर सतर्क हो गया है और कुछ जोखिम वाले इलाकों से सेना की आंशिक वापसी की तैयारी चल रही है।
अमेरिका की ओर से कहा जा रहा है कि यह कदम डर की वजह से नहीं, बल्कि सैनिकों की सुरक्षा और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखकर उठाया जा रहा है। हालांकि, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ईरान की सख्त भाषा और मिडिल ईस्ट में बढ़ते खतरे ने वॉशिंगटन पर दबाव जरूर बनाया है। खासकर इराक, सीरिया और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने इस समय ज्यादा असुरक्षित माने जा रहे हैं।
वहीं ईरान इस पूरे घटनाक्रम को अपनी सख्त नीति की कामयाबी के तौर पर पेश कर रहा है। ईरानी मीडिया में इसे अमेरिका की कमजोरी और दबाव में लिया गया फैसला बताया जा रहा है। आम लोगों के बीच भी यह सवाल उठने लगा है कि क्या अमेरिका अब सीधे टकराव से बचने की कोशिश कर रहा है। यह हालात दिखाते हैं कि ईरान और अमेरिका के बीच टकराव एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। भले ही अमेरिकी सेना की यह वापसी अस्थायी हो, लेकिन इससे यह साफ हो जाता है कि मध्य पूर्व में युद्ध का खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि आगे बातचीत का रास्ता निकलेगा या तनाव और ज्यादा गहराएगा।




