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15 घंटे से ज़्यादा काम, कमाई 782 रुपये — Zomato, Swiggy, Blinkit डिलीवरी ब्वॉय का दर्द

एबीसी नेशनल न्यूज | 14 जनवरी 2026

नई दिल्ली | मोबाइल ऐप पर एक क्लिक करते ही खाना या सामान घर तक पहुंच जाता है, लेकिन इसके पीछे जो मेहनत छुपी है, वह अक्सर नज़र नहीं आती। Zomato, Blinkit और Swiggy जैसी कंपनियों के लिए काम करने वाले डिलीवरी ब्वॉय की ज़िंदगी कितनी कठिन है, यह सौम्यरेंद्र बारिक की कहानी साफ़ दिखाती है। सौम्यरेंद्र ने बताया कि एक दिन में 15 घंटे से भी ज़्यादा काम करने के बाद उन्हें सिर्फ 782 रुपये की कमाई हुई, जबकि पूरे दिन की थकान, ट्रैफिक और खतरे अलग से झेलने पड़े।

सौम्यरेंद्र का कहना है कि सुबह से देर रात तक सड़कों पर रहना पड़ता है। तेज़ धूप, ठंड, बारिश, ट्रैफिक जाम और सड़क हादसों का डर—सब कुछ सहना पड़ता है। कई बार लंबी दूरी तय करने पर भी भुगतान बहुत कम मिलता है। पेट्रोल का खर्च, बाइक की मरम्मत और मोबाइल डेटा जैसी ज़रूरतें उनकी जेब से ही जाती हैं, जिससे असली बचत और भी कम रह जाती है।

डिलीवरी ब्वॉय बताते हैं कि ऐप पर दिखने वाला “इंसेंटिव” अक्सर तय शर्तों से जुड़ा होता है। ऑर्डर ज़रा सा कम हुए या रेटिंग गिरी, तो इंसेंटिव खत्म। कई बार ग्राहक का पता गलत होने या देर होने पर पेनल्टी भी लग जाती है। यानी गलती चाहे सिस्टम की हो, नुकसान डिलीवरी करने वाले को उठाना पड़ता है।

सबसे बड़ी परेशानी यह है कि गिग वर्कर्स को न स्थायी नौकरी का भरोसा है, न न्यूनतम वेतन की गारंटी। बीमार पड़ने पर छुट्टी का पैसा नहीं मिलता और हादसा हो जाए तो इलाज का खर्च खुद उठाना पड़ता है। परिवार की ज़िम्मेदारियों के बीच यह असुरक्षा उन्हें मानसिक तनाव में भी डाल देती है।

श्रम विशेषज्ञों का कहना है कि गिग इकॉनॉमी ने काम के नए मौके तो दिए हैं, लेकिन श्रमिकों की सुरक्षा और सम्मान अब भी बड़ा सवाल है। डिलीवरी ब्वॉय चाहते हैं कि काम के घंटे तय हों, न्यूनतम कमाई सुनिश्चित हो, बीमा और स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें और मनमानी पेनल्टी पर रोक लगे।
सौम्यरेंद्र बारिक की यह कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उन हज़ारों डिलीवरी ब्वॉय की आवाज़ है जो रोज़ हमारी सुविधा के लिए सड़कों पर दौड़ते हैं। सवाल यही है—क्या तेज़ डिलीवरी की कीमत उनकी मेहनत और सम्मान से चुकाई जा रही है?

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