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ट्रंप बोले—भारत छोड़ेगा रूसी तेल! विपक्ष का वार—अमेरिकी दबाव में झुकी मोदी सरकार

वॉशिंगटन / मॉस्को/ नई दिल्ली 23 अक्टूबर 2025

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत की विदेश नीति और आर्थिक स्वायत्तता को सवालों के घेरे में लाते हुए एक विवादास्पद बयान दिया है। ट्रंप ने दावा किया है कि “भारत इस साल के अंत तक लगभग पूरी तरह से रूसी तेल की खरीद बंद कर देगा।” यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रंप से “दिवाली की शुभकामना कॉल” पर बात की थी, जिसके बाद भारत-अमेरिका संबंधों और भारत की ऊर्जा सुरक्षा नीति पर एक नई बहस छिड़ गई है।

विपक्ष ने इस बयान को लेकर मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है और सवाल किया है कि क्या अब भारत की विदेश नीति व्हाइट हाउस या ट्रंप की ट्रुथ सोशल पोस्ट से तय होगी? कांग्रेस प्रवक्ता ने सीधा आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका को दिखाने के लिए झुकना शुरू कर चुके हैं, जबकि लेफ्ट और क्षेत्रीय दलों ने भी यह सवाल उठाया है कि जब पूरी दुनिया रूस से सस्ता तेल खरीद रही है, तो भारत क्यों पीछे हट रहा है? आलोचकों का मानना है कि यह निर्णय स्पष्ट रूप से अमेरिकी दबाव में लिया गया है।

भारत की तेल आयात नीति हमेशा से ‘राष्ट्रीय हित पहले’ पर आधारित रही है, और पिछले दो वर्षों से रूस से छूट पर कच्चा तेल खरीदने की रणनीति ने देश को घरेलू महंगाई पर नियंत्रण रखने में महत्वपूर्ण मदद की है। 2023-24 में, रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता रहा, जो कुल आयात का लगभग 35% हिस्सा था।

ऐसे में, ट्रंप का यह बयान साफ तौर पर संकेत देता है कि अमेरिका और भारत के बीच तेल आयात को लेकर कोई ‘बैकडोर डील’ चल रही है, जिसकी ओर ट्रंप ने अपनी हालिया ‘ट्रुथ सोशल’ पोस्ट में भी इशारा किया था, जहाँ उन्होंने लिखा था: “Modi agreed we are working on stopping Russian oil. Great friend, great country.” विपक्ष ने इसी बात को लेकर प्रधानमंत्री मोदी पर ‘बेस्ट फ्रेंड’ वाली राजनीति में देशहित को खतरे में डालने का आरोप लगाया है। कांग्रेस नेताओं ने कहा है कि ट्रंप हर बार एक बयान देकर मोदी को असहज स्थिति में डालते हैं, और मोदी जी फिर भी उन्हें ‘बेस्ट फ्रेंड’ कहने लगते हैं, जिससे देश की गरिमा और नीति ‘दोस्ती ड्रामा’ की भेंट चढ़ रही है।

इस बढ़ते सियासी विवाद के बीच, विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर सफाई दी है कि “भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा के निर्णय स्वतंत्र रूप से लेता है। किसी देश के बयान से हमारी नीति प्रभावित नहीं होती।” हालांकि, मंत्रालय ने ट्रंप के दावे पर न तो पुष्टि की और न ही खंडन किया, जिससे राजनीतिक हलकों में शोर और बढ़ गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का विश्लेषण है कि ट्रंप का यह बयान भारत को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर ‘अमेरिकी प्रभाव के अधीन’ दिखाने की कोशिश भी हो सकता है, और यह भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और रणनीतिक स्वायत्तता के लिए एक बड़ी चुनौती है।

विपक्ष इसे ‘आर्थिक सरेंडर’ करार दे रहा है, जबकि सरकार कूटनीतिक संतुलन बनाने की बात कह रही है। कुल मिलाकर, इस पूरे घटनाक्रम ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा, रूस के साथ उसके रणनीतिक संबंधों और अंतरराष्ट्रीय दबावों के सामने मोदी सरकार की कूटनीतिक दृढ़ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं, जिसका जवाब देना सरकार के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बन गया है।

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