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“ट्रंप ने हंगरी की अपील ठुकराई: ऑरबन को नहीं मिली रूस-तेल प्रतिबंध से छूट”

वॉशिंगटन/बुडापेस्ट, 2 नवंबर 2025

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑरबन की उस अपील को सख्ती से खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने रूस से तेल खरीद पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों से राहत देने की मांग की थी। ट्रंप का यह कदम स्पष्ट संकेत देता है कि अमेरिका अब अपने “अमेरिका फर्स्ट” एजेंडे से किसी भी कूटनीतिक दबाव के आगे नहीं झुकेगा, चाहे मामला किसी मित्र देश का ही क्यों न हो।

दरअसल, हंगरी लंबे समय से रूस पर अपनी ऊर्जा आपूर्ति के लिए निर्भर रहा है और यूरोपीय संघ की रूस-विरोधी नीतियों से अक्सर असहमति जताता रहा है। ऑरबन ने हाल ही में चेतावनी दी थी कि अगर रूस के तेल और गैस पर रोक जारी रही, तो हंगरी की अर्थव्यवस्था “घुटनों पर आ जाएगी।” उन्होंने ट्रंप से आग्रह किया था कि हंगरी को प्रतिबंधों से अस्थायी छूट दी जाए ताकि वह ऊर्जा संकट से उबर सके।

लेकिन व्हाइट हाउस ने यह प्रस्ताव सिरे से नकार दिया। सूत्रों के अनुसार, ट्रंप ने कहा कि “अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक रणनीति किसी विशेष देश की सुविधा के आधार पर तय नहीं की जा सकती।” इस जवाब से यह साफ हो गया कि वॉशिंगटन अब यूरोपीय राजनीति में “कठोर शर्तों पर साझेदारी” का रुख अपना रहा है।

विश्लेषकों का कहना है कि यह निर्णय अमेरिका और हंगरी के बीच संबंधों में तनाव बढ़ा सकता है। यूरोपीय संघ के भीतर भी यह संकेत गया है कि ट्रंप प्रशासन रूस पर दबाव बनाए रखने के अपने मिशन से पीछे नहीं हटेगा। वहीं, ऑरबन सरकार घरेलू स्तर पर आलोचना झेल रही है कि उसकी रूस-समर्थक नीतियाँ अब हंगरी के लिए आर्थिक जोखिम बनती जा रही हैं।

यह ताज़ा घटनाक्रम यूरोप में ऊर्जा सुरक्षा, रूस के प्रभाव, और अमेरिका की नई विदेश नीति — तीनों पर गहरा असर डाल सकता है। ट्रंप का रुख इस बात की पुष्टि करता है कि आने वाले समय में वॉशिंगटन “मित्रता” से ज़्यादा “हित आधारित कठोर कूटनीति” को प्राथमिकता देगा।

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