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खुद की बहन नहीं थी, तो 101 बेटियों का भाई बन गया यह शख्स! हिंदू-मुस्लिम जोड़ों की कराई शादी

शाहजहांपुर के कारोबारी विनय अग्रवाल की अनूठी पहल, 93 हिंदू जोड़ों ने वैदिक रीति से लिए सात फेरे, 8 मुस्लिम जोड़ों का हुआ निकाह; एक ही समारोह में दिखी गंगा-जमुनी तहजीब की खूबसूरत तस्वीर

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | शाहजहांपुर | 27 अक्टूबर 2026

जिस शख्स की अपनी कोई बहन नहीं थी, उसने 101 गरीब परिवारों की बेटियों का भाई बनकर उनकी शादी की जिम्मेदारी उठाई। उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में कारोबारी विनय अग्रवाल ने ऐसा आयोजन किया, जिसने इंसानियत, भाईचारे और सामाजिक जिम्मेदारी की मिसाल पेश की। उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के 101 जोड़ों की शादी कराकर बेटियों को सम्मान के साथ नई जिंदगी शुरू करने का अवसर दिया।

यह सामूहिक विवाह समारोह रविवार को शाहजहांपुर के खिरनी बाग में आयोजित किया गया। समारोह में हिंदू और मुस्लिम, दोनों समुदायों के जोड़े शामिल हुए। 93 हिंदू जोड़ों ने वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह किया, जबकि आठ मुस्लिम जोड़ों का निकाह धर्मगुरुओं की मौजूदगी में संपन्न हुआ।

बहन नहीं थी, तो 101 बेटियों का भाई बना

विनय अग्रवाल स्नैक्स का कारोबार करते हैं। अपनी जिंदगी में बहन की कमी को उन्होंने जरूरतमंद परिवारों की बेटियों की मदद करने के संकल्प में बदल दिया। उन्होंने 101 महिलाओं की शादी का इंतजाम कर उन्हें भाई का स्नेह और सहयोग देने की कोशिश की।

गरीब परिवारों के लिए बेटी की शादी करना अक्सर बड़ी आर्थिक चुनौती होता है। शादी की तैयारियों से लेकर मेहमानों की व्यवस्था तक, हर कदम पर खर्च की चिंता बनी रहती है। ऐसे में विनय अग्रवाल की पहल ने इन परिवारों को राहत देने के साथ बेटियों की शादी को सम्मानपूर्ण तरीके से संपन्न कराने में मदद की।

यह आयोजन केवल विवाह कराने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन परिवारों के लिए खुशी का अवसर भी बना, जो आर्थिक परेशानियों के कारण शादी की तैयारियों को लेकर चिंतित रहते हैं।

93 हिंदू विवाह, आठ मुस्लिम निकाह

समारोह में अलग-अलग धर्मों की परंपराओं का सम्मान किया गया। हिंदू जोड़ों का विवाह वैदिक मंत्रों और रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ। मुस्लिम जोड़ों का निकाह धर्मगुरुओं ने कराया।

एक ही आयोजन में दोनों समुदायों के परिवारों की भागीदारी ने सामाजिक एकता की सुंदर तस्वीर पेश की। विवाह समारोह में शामिल लोगों ने खुशियां साझा कीं और नवविवाहित जोड़ों को नई जिंदगी के लिए शुभकामनाएं दीं।

101 गाड़ियों से पहुंचे दूल्हा-दुल्हन

इस सामूहिक विवाह समारोह को यादगार बनाने के लिए खास इंतजाम भी किए गए थे। दुल्हनों को स्थानीय ब्यूटी पार्लरों में तैयार कराया गया। सभी 101 जोड़ों को 101 गाड़ियों में समारोह स्थल तक लाया गया।

कार्यक्रम स्थल पर एक बड़े साझा पंडाल में परिवारों और मेहमानों ने मिलकर खुशियां मनाईं। पूरे आयोजन में उत्सव जैसा माहौल रहा। गरीब परिवारों के लिए यह अवसर इसलिए भी खास था, क्योंकि उनकी बेटियों की शादी सम्मान और धूमधाम के साथ संपन्न हुई।

इंसानियत और भाईचारे का संदेश

आज जब समाज में धर्म और समुदाय के नाम पर मतभेद की खबरें सामने आती रहती हैं, ऐसे आयोजन यह याद दिलाते हैं कि इंसानियत और सामाजिक सहयोग की भावना लोगों को जोड़ सकती है। विनय अग्रवाल की पहल में अलग-अलग धर्मों के परिवारों ने एक साथ खुशियां मनाईं और नवविवाहित जोड़ों के नए जीवन की शुरुआत का हिस्सा बने।

इस आयोजन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि मदद का केंद्र जरूरतमंद परिवार और उनकी बेटियां रहीं। शादी जैसे अहम अवसर पर आर्थिक बोझ कम करना और बेटियों को सम्मान के साथ विदा करने में सहयोग देना सामाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण है।

विनय अग्रवाल की यह पहल एक सीधा संदेश देती है—रिश्ते केवल खून से नहीं बनते, उन्हें संवेदना, जिम्मेदारी और इंसानियत से भी निभाया जा सकता है। अपनी बहन न होने की कमी को 101 बेटियों के भाई बनने के संकल्प में बदलकर उन्होंने ऐसा काम किया, जिसकी चर्चा लंबे समय तक होती रहेगी।

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