खेल | ABC NATIONAL NEWS | गाले | 17 अगस्त 2016
भारतीय ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के शुरुआती दिनों को लेकर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि घरेलू क्रिकेट में शानदार बल्लेबाजी रिकॉर्ड होने के बावजूद भारतीय टीम में उन्हें निचले क्रम पर भेजे जाने से उनका आत्मविश्वास कई बार बुरी तरह प्रभावित हुआ। जडेजा ने कहा कि उस दौर में उनके मन में यह सवाल तक उठता था कि “क्या टीम को मेरी बल्लेबाजी पर भरोसा नहीं है?”
जडेजा ने बताया कि रणजी ट्रॉफी और दलीप ट्रॉफी में उनका बल्लेबाजी औसत 60 से ज्यादा रहा था और उन्हें अपनी बल्लेबाजी क्षमता पर पूरा विश्वास था। लेकिन भारतीय टीम में आने के बाद उन्हें अक्सर नंबर 8 या 9 पर बल्लेबाजी करनी पड़ती थी।
उन्होंने कहा कि जब वह ड्रेसिंग रूम में पैड पहनकर अपनी बारी का इंतजार करते थे और उनके बगल में कोई तेज गेंदबाज बल्लेबाजी के लिए तैयार होता था, तो इससे उनका मनोबल गिरता था। जडेजा के मुताबिक, ऐसी परिस्थितियों में उन्हें लगता था कि टीम उनकी बल्लेबाजी को उतना महत्व नहीं दे रही।
‘कई बार अश्विन से भी नीचे बल्लेबाजी की’
जडेजा ने स्वीकार किया कि शुरुआती वर्षों में उन्हें कई बार रविचंद्रन अश्विन से भी नीचे बल्लेबाजी करने के लिए भेजा गया। उनके मुताबिक, लगातार ऐसी परिस्थितियों ने उनके आत्मविश्वास को प्रभावित किया और वह मानसिक रूप से परेशान होते थे।
हालांकि, समय के साथ जडेजा ने खुद को एक भरोसेमंद टेस्ट बल्लेबाज के रूप में स्थापित किया। उन्होंने लंबी पारियां खेलने के लिए जरूरी धैर्य और मानसिक मजबूती विकसित की और टीम में उनकी बल्लेबाजी की भूमिका भी मजबूत हुई।
भारत की मजबूत शुरुआत, पडिक्कल का शतक
जडेजा की यह बातचीत भारत और श्रीलंका के बीच गाले में खेले जा रहे टेस्ट मैच के दौरान सामने आई है। बारिश से प्रभावित पहले दिन भारत ने 288/2 का मजबूत स्कोर बनाया।
युवा बल्लेबाज देवदत्त पडिक्कल ने शानदार नाबाद 131 रन बनाकर अपना पहला टेस्ट शतक पूरा किया, जबकि केएल राहुल ने 77 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली। दिन का खेल समाप्त होने तक ऋषभ पंत 27 रन बनाकर नाबाद थे।
जडेजा की कहानी सिर्फ उनके क्रिकेट करियर के शुरुआती संघर्ष की कहानी नहीं है, बल्कि यह भी दिखाती है कि टीम में भूमिका और भरोसा किसी खिलाड़ी के आत्मविश्वास को किस तरह प्रभावित कर सकता है। आज भारतीय टीम के अनुभवी ऑलराउंडरों में शामिल जडेजा ने जिस दौर को पीछे छोड़ा, उसमें खुद पर भरोसा बनाए रखना उनके सफर का अहम हिस्सा रहा।




