अपराध/ स्वास्थ/ राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | 16 अगस्त 2026
खाने-पीने की चीजों की गुणवत्ता और उपभोक्ताओं की सुरक्षा को लेकर देशभर में खाद्य नियामक एजेंसियों ने सख्ती बढ़ा दी है। हाल की कार्रवाइयों में बड़े रेस्टोरेंट ब्रांड्स से लेकर क्विक-कॉमर्स कंपनियों, लग्जरी होटलों और पैकेज्ड फूड निर्माताओं तक पर खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के आरोप सामने आए हैं। मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि जिन कंपनियों और ब्रांड्स से उपभोक्ता साफ-सफाई, गुणवत्ता और सुरक्षित खाद्य पदार्थ की उम्मीद करते हैं, उन्हीं के कुछ आउटलेट और स्टोरेज सेंटरों में ऐसी खामियां मिलने की बात सामने आई है जो सीधे उपभोक्ता स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं।
सबसे चौंकाने वाला मामला महाराष्ट्र के ठाणे जिले से सामने आया, जहां कल्याण के गोडरेज हिल इलाके में Blinkit के एक स्टोर के आइसक्रीम फ्रीजर में चूहे घूमते हुए दिखाई देने वाला वीडियो सामने आया। घटना के बाद खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने कार्रवाई की। मामला केवल एक फ्रीजर में चूहे मिलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल भी उठाता है कि ऐसे खाद्य उत्पादों के भंडारण और पेस्ट-कंट्रोल की नियमित निगरानी किस स्तर पर होती है और अगर किसी ग्राहक तक ऐसा उत्पाद पहुंच जाए तो जिम्मेदारी किसकी होगी।
कर्नाटक में भी खाद्य सुरक्षा को लेकर कार्रवाई तेज हुई। मंगलुरु के एक KFC आउटलेट पर ग्राहक द्वारा कथित तौर पर बदबूदार और खराब चिकन मिलने की शिकायत के बाद अधिकारियों ने अचानक निरीक्षण किया। आउटलेट की रसोई, स्टोर रूम और कोल्ड स्टोरेज की जांच की गई और खाद्य नमूने परीक्षण के लिए भेजे गए। जांच के दौरान संबंधित स्टोर के गोदाम को सील किए जाने की भी जानकारी सामने आई है। यहां अंतिम जिम्मेदारी और खाद्य पदार्थों की वास्तविक गुणवत्ता का निर्धारण जांच रिपोर्ट के आधार पर ही होगा, लेकिन शिकायत और उसके बाद हुई कार्रवाई ने बड़े फूड चेन आउटलेट्स में स्टोरेज और गुणवत्ता नियंत्रण को लेकर बहस जरूर तेज कर दी है।
मामला केवल फास्ट-फूड चेन तक सीमित नहीं रहा। मैसूरु में खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई के दौरान प्रीमियम होटलों से बड़ी मात्रा में कथित तौर पर एक्सपायर्ड मांस बरामद किए जाने की बात सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार तीन सितारा Rio Meridian Hotel से करीब 9 किलो एक्सपायर्ड चिकन, Grand Mercure Hotel से करीब 68 किलो मांस और Q Star Hotel से करीब 4 किलो मशरूम जब्त किए गए। अगर ये आंकड़े जांच में सही पाए जाते हैं तो सवाल केवल होटल की रसोई का नहीं, बल्कि उन निगरानी प्रणालियों का भी है जो महंगे और प्रतिष्ठित होटलों में खाद्य सामग्री के भंडारण और उपयोग की निगरानी करती हैं।
बेंगलुरु के Hoskote इलाके में क्विक-कॉमर्स कंपनी Zepto के एक वेयरहाउस पर भी खाद्य पदार्थों की लेबलिंग, हैंडलिंग और स्टोरेज से जुड़े कथित उल्लंघनों को लेकर कार्रवाई की गई और वेयरहाउस को सील किए जाने की जानकारी सामने आई। वहीं बेंगलुरु के कई लग्जरी होटलों के निरीक्षण में अस्वच्छ स्टोरेज, सब्जियों पर फंगस और शाकाहारी तथा मांसाहारी खाद्य पदार्थों के पर्याप्त पृथक्करण की कमी जैसी समस्याएं सामने आने की बात कही गई। 26 होटलों की कार्रवाई में खराब मांस, चिकन, मछली और एक्सपायर्ड बेकरी उत्पाद जब्त किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई का दायरा भी बड़ा बताया गया है। विशेष अभियान के दौरान 104 चेन रेस्टोरेंट प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया। विभाग के अनुसार दो प्रतिष्ठानों को कारोबार रोकने का आदेश दिया गया, 95 को सुधार नोटिस जारी किए गए और पांच के लाइसेंस निलंबित किए गए। Pizza Hut के एक आउटलेट पर पैकेटों पर एक्सपायरी डेट का उल्लेख नहीं होने को लेकर कार्रवाई की गई। वहीं विदर्भ के अकोला जिले में Sapphire Foods India के एक आउटलेट पर कथित तौर पर जमे हुए पनीर और घटिया खाद्य सामग्री के इस्तेमाल को लेकर कार्रवाई की जानकारी सामने आई है।
नाशिक और मुंबई में भी निरीक्षण के दौरान खाद्य कारोबार से जुड़े लाइसेंस निलंबित किए गए। विभाग के अनुसार वहां स्वच्छता, भंडारण, पानी, वेंटिलेशन, उपकरण और पेस्ट-कंट्रोल से जुड़ी कमियां पाई गईं। 120 प्रतिष्ठानों के निरीक्षण के बाद 54 सुधार नोटिस जारी किए गए। अलग-अलग छापों में कथित तौर पर करीब 5,343 किलो घटिया डेयरी उत्पाद, तेल और मसाले जब्त किए गए, जिनकी कीमत करीब ₹9.81 लाख बताई गई है। प्रतिबंधित उत्पादों से जुड़े अलग अभियान में गिरफ्तारियां, प्रतिष्ठानों को सील करने और लाखों रुपये के स्टॉक जब्त किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
खाद्य सुरक्षा की यह कार्रवाई केवल रेस्तरां और होटलों तक सीमित नहीं है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी FSSAI की कार्रवाई में पैकेज्ड और उपभोक्ता उत्पादों की लेबलिंग तथा दावों पर भी सवाल उठे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक Dabur के कुछ उत्पादों, जिनमें घी और शहद जैसे उत्पाद शामिल हैं, पर कथित रूप से ऐसे ‘100 प्रतिशत’ दावों को लेकर कार्रवाई की गई जिनका सत्यापन नियामक के मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया। ऐसे मामलों में असली मुद्दा यह है कि उपभोक्ता पैकेट पर लिखे दावों को भरोसे के साथ स्वीकार करता है; इसलिए लेबल पर मौजूद हर महत्वपूर्ण जानकारी और दावा नियामकीय मानकों के अनुरूप होना जरूरी है।
शराब उत्पादों की लेबलिंग और फ्लेवरिंग को लेकर भी FSSAI ने कार्रवाई की जानकारी दी है। 2 अगस्त को जारी जानकारी के अनुसार कुछ व्हिस्की और रम उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई, जिसमें Old Monk, Royal Challenge, Antiquity Blue और Bagpiper जैसे लोकप्रिय ब्रांड्स के कुछ वेरिएंट का उल्लेख किया गया। नियामक के अनुसार विवाद फ्लेवरिंग की ऐसी प्रथाओं से जुड़ा था जिनसे उत्पाद के स्वाद और सुगंध को निर्धारित मानकों के अनुरूप बनाने के बजाय कृत्रिम रूप से समान प्रोफाइल देने का आरोप था। संबंधित कंपनियों के लिए अंतिम स्थिति नियामकीय प्रक्रिया और उनके जवाबों पर निर्भर करेगी।
इस पूरी कार्रवाई की सबसे बड़ी सीख यही है कि खाद्य सुरक्षा केवल किसी रेस्टोरेंट की रसोई साफ रखने का मामला नहीं है। यह खेत और कारखाने से लेकर गोदाम, कोल्ड स्टोरेज, पैकेजिंग, डिलीवरी और आखिरकार उपभोक्ता की प्लेट तक पूरी सप्लाई चेन की जिम्मेदारी है। आज जब क्विक-कॉमर्स के जरिए दूध, आइसक्रीम, मांस, पैकेज्ड फूड और तैयार खाद्य पदार्थ कुछ ही मिनटों में घर पहुंच रहे हैं, तब स्टोरेज और तापमान नियंत्रण की निगरानी पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। एक तरफ उपभोक्ता सुविधा चाहता है और दूसरी तरफ कंपनियां तेज डिलीवरी का दावा करती हैं, लेकिन इस पूरी व्यवस्था में खाद्य सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता।
ग्राहक सिर्फ खाना नहीं खरीदता—वह उस ब्रांड पर भरोसा खरीदता है। इसलिए Blinkit के फ्रीजर में चूहे का मामला हो, KFC के चिकन की शिकायत हो, होटलों में कथित एक्सपायर्ड मांस मिले या पैकेज्ड उत्पादों के लेबल पर सवाल उठें—हर मामले में कार्रवाई सिर्फ नोटिस और सीलिंग तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। जहां नियम टूटे हैं वहां कड़ी जवाबदेही हो, और जहां शिकायतें गलत साबित हों वहां तथ्यों को भी सार्वजनिक किया जाए। खाद्य सुरक्षा में लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं हो सकती, क्योंकि यहां गलती का सीधा असर इंसान की सेहत पर पड़ता है।




