[the_ad id="179"]
Home » National » सुप्रीम कोर्ट में अरावली और स्ट्रीट डॉग्स पर बहस: सिंघवी बोले— नियम मौजूद हैं, कोर्ट हर मुद्दे में दखल न दे

सुप्रीम कोर्ट में अरावली और स्ट्रीट डॉग्स पर बहस: सिंघवी बोले— नियम मौजूद हैं, कोर्ट हर मुद्दे में दखल न दे

अवधेश कुमार | नई दिल्ली 9 जनवरी 2026

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में स्ट्रीट डॉग्स (आवारा कुत्तों) से जुड़े मामलों और अरावली क्षेत्र से संबंधित एक याचिका की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अहम दलीलें रखीं। उन्होंने कहा कि कुत्तों से जुड़े नियम और कानून पहले से मौजूद हैं, ऐसे में हर मुद्दे पर अदालत का हस्तक्षेप ज़रूरी नहीं है। सिंघवी ने यह भी ज़ोर दिया कि तकनीकी और नीति से जुड़े मामलों में फैसले एक्सपर्ट्स की सलाह के आधार पर ही होने चाहिए, न कि प्रशासनिक राय या तात्कालिक दबाव में। सुनवाई के दौरान सिंघवी ने अदालत को बताया कि Animal Birth Control (ABC) Rules समेत कई दिशा-निर्देश पहले से लागू हैं, जिनके तहत आवारा कुत्तों की देखरेख, नसबंदी और टीकाकरण की व्यवस्था की गई है। उनका कहना था कि अगर किसी जगह समस्या है तो नियमों के सही क्रियान्वयन पर ध्यान दिया जाना चाहिए, न कि नए आदेशों से भ्रम की स्थिति पैदा की जाए। अरावली क्षेत्र को लेकर सिंघवी ने एक अहम उदाहरण देते हुए कहा कि अधिकारियों की राय और रिपोर्ट के आधार पर पहले लिया गया एक फैसला पलटना पड़ा।

उन्होंने इशारों में कहा कि जब एक्सपर्ट इनपुट की जगह अफसरशाही की राय को प्राथमिकता दी जाती है, तो उसके नतीजे टिकाऊ नहीं होते। ऐसे मामलों में अदालत को संयम बरतते हुए विशेषज्ञ संस्थानों और वैज्ञानिक आकलन पर भरोसा करना चाहिए। सिंघवी की दलीलों पर कोर्ट ने भी संकेत दिया कि नीति और प्रशासनिक मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप की एक सीमा होती है। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि जहां नियम और गाइडलाइंस मौजूद हों, वहां पहले उनके पालन की स्थिति देखी जानी चाहिए। साथ ही, जनहित और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को संतुलित ढंग से परखा जाना जरूरी है।

यह मामला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि शहरी इलाकों में स्ट्रीट डॉग्स को लेकर बढ़ती शिकायतें और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अरावली जैसे संवेदनशील क्षेत्र—दोनों ही मुद्दे व्यापक जनहित से जुड़े हैं। कोर्ट में हुई इस बहस से यह संकेत मिलता है कि आने वाले समय में ऐसे मामलों में एक्सपर्ट-आधारित निर्णय और मौजूदा नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन पर ज़ोर दिया जा सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *